PM Modi's speech during the inauguration of SEMICON India 2026
हैप्पी हैप्पी हैप्पी आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद थैंक यू केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे साथी अश्विनी वैष्णव जी जितन प्रसाद जी उपस्थित सभी इंडस्ट्री लीडर्स सीईओस डेलीगेट्स और वर्चुअली हमारे साथ सैकड़ों यूनिवर्सिटीज और इंस्टट्यूट्स के भारत के भविष्य ऐसे मेरे नवजवान साथियों यहां उपस्थित बहुत बड़ी सत संख्या में आए हुए उत्साहित नौजवानों देवियों और सज्जनों सेमीकॉन इंडिया का यह पांचवा एडिशन हो रहा है। मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। विदेश से जो अतिथि आए हैं, मैं उनका भारत में विशेष स्वागत करता हूं। साथियों आज विश्वकर्मा जयंती का दिवस भी है। मैं सभी देशवासियों को विश्वकर्मा जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। हमारी परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन की शक्ति का प्रतीक माना गया है। और संयोग देखिए आज से ही सेमिकॉन इंडिया की शुरुआत हो रही है। एक तरफ हमारी सदियों पुरानी निर्माण की परंपरा और दूसरी तरफ। 21वीं सदी की टेक्नोलॉजी और विज़न। यही आत्मनिर्भर भारत की विकसित भारत की हमारी प्रेरणा भी है। फ्रेंड्स, विकसित भारत बनाने के लिए हर देशवासी एक कमिटमेंट के साथ जुटा है। अगर हम बीते 15 दिनों की ही देखें सिर्फ मैं 15 दिनों की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करता हूं तो अंदाजा लगता है कि भारत किस दिशा में किस तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी सितंबर में ठीक 10 दिन पहले मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट हुआ। इसमें एजेंटिक एआई टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के जरिए इंक्लूसिव फाइनेंस पर चर्चा हुई। इसी दौरान भारत में करीब 3000 किलोमीटर का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पूरी तरह ऑपरेशनल हो गया। ये मैं सितंबर के 10 दिन की बात कर रहा हूं दोस्तों। बहुत पुरानी बात नहीं कर रहा हूं। इससे देश में फ्रेट मूवमेंट तेज होगा। लॉजिस्टिक बेहतर होगा और मैन्युफैक्चरिंग को भी नई ताकत मिलेगी। साथियों इसी कालखंड में इसी सितंबर में ही भारत की क्वार्टरली जीडीपी रिपोर्ट आई। और इस चैलेंजिंग पीरियड में भी भारत ने 7.8% ग्रोथ हासिल करके दिखाई है। और इसी दरमियान जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की सोवन रेटिंग टीम रेटिंग में सुधार किया है। अपग्रेड किया है। और यह भी तीन दशक के बाद करीब 35 साल के बाद हुआ है। यानी एक तरफ भारत की इकॉनमी बढ़ रही है। दूसरी तरफ दुनिया का भारत पर भरोसा भी बढ़ता जा रहा है। साथियों इसी भरोसे की एक और बड़ी तस्वीर तीन दिन पहले खत्म हुई ब्रिक्स समिट में दिखाई दी है। भारत ने इस समिट की सफलतापूक मेजबानी की। सबकी सहमति से न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन का अडॉप होना भारत पर विश्व के भरोसे का एक और बड़ा प्रमाण है। साथियों भारत की इन उपलब्धियों के बीच सेमीकॉन इंडिया का यह आयोजन और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसका पहला एडिशन 2022 में हुआ था और तब से हम हर वर्ष मिलते हैं। लेकिन हर वर्ष हमारी चर्चा का विषय बदलता गया है। जब पहला एडिशन हुआ था तब हमने पॉलिसी पर बात की थी। इसके बाद के एडिशंस में बात आगे बढ़ी। अगले एडिशन में हम प्रोजेक्ट पर चर्चा करने लगे। फाइल पर साइन से लेकर शिलान्यास की बातें होने लगी। पिछले साल हमने पायलट लाइंस और टेस्ट चीज पर चर्चा शुरू की। कैसे भारत की यूनिट से पहले सैंपल निकलने शुरू हुए इस पर बात की और इस साल हम कमर्शियल प्रोडक्शन की बात कर रहे हैं। अब भारत के प्लांट से निकल कर हमारी चिप्स देश और दुनिया के कस्टमर्स तक पहुंचना शुरू हुई है। और अभी-अभी मोहाली और सूरत में दो और प्लांट्स में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो रहा है। मैं उनको भी बधाई देता हूं। फ्रेंड किसी भी देश के लिए इतने कम समय में यहां तक पहुंचना आसान नहीं है। यह सेक्टर ऐसा नहीं है कि फैक्ट्री लगाई और काम पूरा हो गया। इसमें टेक्नोलॉजिकल कैपेबिलिटीज बनाने में दशकों लगते हैं। दुनिया में जहां भी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बने हैं, वहां यह पूरा इकोसिस्ट दशकों की मेहनत के बाद तैयार हुई है। लेकिन भारत ने आपके सहयोग से चिप डिजाइन हो मैन्युफैक्चरिंग हो, इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग, मटेरियल इको सिस्टम, टेस्टिंग कैपेबिलिटी हो, इन सभी पर एक साथ काम किया और सफलता हासिल करके दिखाई है। हमारी इस यात्रा में बहुत बड़े स्टेक होल्डर्स आप सभी इंडस्ट्री लीडर्स रहे हैं। आप भारत की सफलता के पिलर्स हैं। आप हमारी इस जर्नी के पार्टनर्स हैं। साथियों सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में एक शब्द इस्तेमाल होता है टैप आउट। यह वो दिन होता है जब चीप डिजाइन पूरा होने के बाद प्रोडक्शन के लिए चली जाती है। लेकिन टैप आउट के बाद काम रुकता नहीं है। उसी दिन अगले वर्जन पर काम शुरू हो जाता है। और भारत भी यही कर रहा है। भारत ने सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा फेज शुरू कर दिया है। हमारे पहले फेज का साइज लगभग $8 बिलियन डॉलर्स का था। जबकि सेकंड फेज का 13.5 बिलियन डॉलर तक का हमने तय किया है। रिफॉर्म एक्सप्रेस पर चलते हुए हमने इस सेक्टर में और भी रिफॉर्म्स किए हैं। अब इंटरनेशनल कंपनीज भी हमारे स्टार्टअप्स के साथ इंडियन डिजाइन कंपनीज और ओसीआई ओन कंपनीज के साथ कोलबोरेशन कर सकते हैं। यानी पॉलिसीज हो, फंड्स हो, रेगुलेटरी फ्रेमवर्क हो, आपके प्रोजेक्ट की सफलता के लिए जो कुछ भी चाहिए, वह हर कदम भारत सरकार उठा रही है। साथियों, हमारा प्रयास है कि भारत में फैबलेस कंपनीज की ग्रोथ हो और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज का क्रिएशन भी भारत में ही हो। अलग-अलग टाइप्स के कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स बनाने हो। सिलिकॉन फोटोनिक्स को इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना हो। एआई इनेबलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए यह सब जरूरी है। और इस दिशा में हमें मिलकर आगे बढ़ना होगा। इसके लिए जो फाउंडेशन चाहिए वह तैयारी हो चुकी है। सप्लाई चेन की मजबूती पर भी भारत का बहुत अधिक फोकस है। इसके लिए अनेक रिफॉर्म्स किए गए हैं। यहां जो इक्विपमेंट कंपनीज़ के लीडर्स हैं, मैं आपसे कहूंगा कि आप भी इसका लाभ उठाने में पीछे मत रहिएगा। केमिकल, गैसेस और मटेरियल्स के लिए, उसके लीडर्स के लिए भी भारत में सुनहरा अवसर उनका इंतजार कर रहा है। हम चाहते हैं कि पूरा इको सिस्टम एक साथ ग्रो करें। इसके लिए डिमांड पाइपलाइन भी तैयार है। अभी तक 12 प्रोजेक्ट्स को अप्रूवल मिल चुका है और नेक्स्ट फेज में यह दायरा और बढ़ेगा। साथियों भारत में आप सभी के लिए एक और एडवांटेज यूथ का है। टैलेंटेड स्किल मैन पावर का है। आज हमारे पास इंजीनियरिंग टैलेंट का बहुत बड़ा पूल है। भारत में हजारों इंजीनियरिंग कॉलेजेस है। और भारत हर साल लाखों इंजीनियर्स प्रोड्यूस करता है। एक बार मुझे अमेरिका के एक कंपनी के सज्जन मिलने आए थे। तो बोले हम हमारे यहां अगर इंजीनियर्स के लिए भर्ती करना चाहे उनको बुलाएं तो एक कमरे में आ जाए इतने लोग आते हैं और बोले हिंदुस्तान में बुलाए तो फुटबॉल का मैदान भी छोटा पड़ जाता है यह ताकत है भारत की और साथियों चीप डिजाइनिंग के लिए तो बहुत बड़े पैमाने पर स्केलिंग का काम चल रहा है। अभी मुझे यहां आने से पहले यहीं पर कैंपस में इंडस्ट्री जुड़े कुछ युवा साथियों से मैंने मुलाकात भी की है। सारे स्टूडेंट्स से इन स्टूडेंट्स ने मुझे अपनी डिजाइन की गई चिप्स उपहार में दी है। हमारी सरकार 1 लाख इंजीनियरिंग छात्रों को सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए ट्रेन करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। और अभी आपको बताया गया इसमें से 70 हजार से ज्यादा नौजवानों को ट्रेनिंग दी भी दे चुके हैं हम लोग। इतना बड़ा टैलेंट पूल आप सभी के लिए भी एक तरह से गोल्ड माइंड से कम नहीं है। साथियों सरकार के इन प्रयासों के बीच मैं आज युवाओं से भी आह्वान करूंगा जो यंग टैलेंट्स भारत में रिसर्च कर रहे हैं वे आगे आए। जो युवा विदेशों में रिसर्च कर रहे हैं, वे भी भारत में एडवांस टेक्नोलॉजीस के डेवलपमेंट से जुड़े। मैं इंडस्ट्री लीडर से आग्रह करता हूं। आप देश में आरएडी को लीड करें। इसमें इंडस्ट्री का भी फायदा है और भारत की युवा शक्ति को भी इससे ताकत मिलेगी। साथियों आगे बढ़ती हुई सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। आप सभी उनसे परिचित हैं। सालों तक आपकी इंडस्ट्री में लोग ट्रांजिस्टर की साइज की बात करते थे। जैसे-जैसे ट्रांजिस्टर छोटे हुए कंप्यूटिंग उतनी ही फास्ट और एफिशिएंट होती गई। आज भी यह सवाल महत्वपूर्ण है। लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से इस इंडस्ट्री के सामने कुछ नए सवाल भी खड़े हुए हैं। बीते दो वर्षों में ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट की ग्रोथ 20% से ज्यादा रही है और इस ग्रे ग्रोथ में बहुत बड़ा एआई से पैदा हुई डिमांड का है। यानी आज अगर आप एआई पर काम कर रहे हैं तो चुनौतियां सिर्फ यह नहीं है कि चिप के अंदर क्या है बल्कि चुनौती यह भी है कि इसके इर्द-गिर्द क्या हो रहा है। मेमोरी को प्रोसेसर के और करीब लगाना हो। कई सारी चिप्स को इस तरह जोड़ना हो। कि वे मिलकर एक ही सिस्टम की तरह काम करें। बिना किसी डिले के बहुत बड़ी मात्रा में डाटा यहां से वहां पहुंचाना हो। हीट और पावर को मैनेज करना हो। ऐसी अनेक चुनौतियां सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के सामने है। इन चुनौतियों के बीच दुनिया को मैन्युफैक्चरिंग के लिए नई और भरोसेमंद। और यह मैं बहुत जिम्मेवारी से कहता हूं। नई और भरोसेमंद लोकेशनेशंस की भी जरूरत सबसे ज्यादा हो रही है। और भारत मैं आपको विश्वास दिलाता हूं भारत इसके लिए खुद को लगातार तैयार कर रहा है। साथियों आज की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के सामने एक और बड़ा विषय एनर्जी सिक्योरिटी का भी है। एआई के लिए जो चिप्स बन रही हैं उनका इस्तेमाल एआई डाटा सेंटर्स में हो रहा है। इन डाटा सेंटर्स में हजारों हाई परफॉर्मेंस प्रोसेसर एक साथ काम कर रहे हैं। यह बहुत बड़ी मात्रा में डाटा प्रोसेस कर रहे हैं। जैसे-जैसे एआई का विस्तार होगा, कंप्यूटिंग पावर की जरूरत भी उसी गति से बढ़ेगी और कंप्यूटर पावर जितनी बढ़ेगी बिजली की जरूरत भी उतनी ही ज्यादा होती जाएगी। इसलिए पावर सेक्टर में निवेश भी बहुत जरूरी है। हमारे प्लांट जहां है वहां पर समय पर बिजली मिले। जरूरत के समय जरूरत की मात्रा में मिले यह बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए भारत आज पावर सेक्टर में भी बहुत बड़ा निवेश कर रहा है। बीते दशक में हमारी इंस्टॉल सोलर एनर्जी कैपेसिटी करीब 2 गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट से ज्यादा हो गई है। 260 न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस सेक्टर को प्राइवेट प्लेयर्स के लिए खोला गया है। हम स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर पर भी काम कर रहे हैं। बीते एक दशक में भारत ने अपने ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी एक्सपेंड किया है। साथियों, भारत में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का यह विस्तार हमारे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए भी एक बड़ी स्ट्रेंथ है। भारत हर वो कदम उठा रहा है जो हमें सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का एक प्रेफर्ड डेस्टिनेशन बनाए। फ्रेंड्स, भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी है। कुछ वर्ष पहले ही हमारे संविधान को 75 साल हुए हैं। ऐसा देश जब एक क्रिटिकल इंडस्ट्री में सफल होता है तो इससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को ताकत मिलती है। और आज जब सप्लाई चेन वेपनाइज हो रही है तब तो इसकी महत्ता बहुत बढ़ जाती है। भारत में हो रहे इस डेवलपमेंट को हमें इस बड़े नजरिए से भी देखना है। भारत के एस्पिरेंस आपके सामने है। और भारत में बन रहे नए अवसर आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। एक बार फिर आप सभी को इस आयोजन के लिए मेरी ढेरों शुभकामनाएं हैं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।