PM Modi's speech during the 'Namo for Viksit Bharat' programme in Vadodara, Gujarat
भारत माता की जय भारत माता की जय गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल इस कार्यक्रम में ऑनलाइन हमारे साथ अनेक राज्यों के महानुभाव जुड़े हैं। महाराष्ट्र के गवर्नर विष्णुदेव वर्मा जी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस जी, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंद जी, डिप्टी सीएम श्रीमती सुत्र पवार जी, अन्य मंत्रीगण, सांसद गण, विधायक गण और वहां पर भी इकट्ठे इकट्ठे हुए लाखों नागरिक भाई बहन यहां मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी अश्विनी वैष्णव उपमुख्यमंत्री युवा नेता हर्ष संघवी गुजरात सरकार के मंत्रीगण उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधि गण गुजरात के मेरे प्यारे भाई भाइयों और बहनों अ खास इटले म वड़ोदराना महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का यह मैदान अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का यह उत्सव यहां सब कुछ एक साथ हो रहा है। साथियों आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं देश की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस विकास पर्व पर आप सभी ने जिस सेवा भाव से और सेवा भाव के साथ पूरे वड़ोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है। इसके लिए मैं बड़ोदरा के हर एक नागरिक को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। उनकी सराहना करता हूं। और यह जो आपने रंग दिखाया ना मैं कल एक वीडियो देख रहा था। सीना चौड़ा हो गया। वाह! क्या मेरा वड़ोदरा और अब तो गणेशोत्सव की तैयारी बाद में नवरात्रि और गणेशोत्सव और नवरात्रि पूरा गुजरात का ध्यान वड़ोदरा पर होता है। और आज आपने मैं देख रहा था पिछले एक सप्ताह से हर परिवार में वातावरण बन गया स्वच्छता का। मुझे लगता है कि इस बार जब गणेश जी पधारेंगे ना सारे आशीर्वाद वड़ोदरा पर बरसने वाले हैं। साथियों इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गति शक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गति शक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई है। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। यह 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है। साथियों यह डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं। जब इसका विचार शुरू हुआ आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा। उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रही। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी। और दुर्भाग्य देखिए इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ। फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थी, लटकती थी, भटकती थी। और 2014 में वड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल के दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही। आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई। और सच्चाई यह थी कि सात आठ वर्ष में जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए याद रखिए सात आठ वर्ष में 1 किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर का पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते तो पता नहीं आपके बाद तीन चार पीढ़ियां आती तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक इको सिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की यह हालत करके रखी थी। साथियों 2014 के बाद आपने जो मुझे शिक्षा दीक्षा दी थी इस धरती ने मुझे जो सिखाया था आपके पास से जो लेसन ले मैं दिल्ली पहुंचा था। हमने वहां पहुंचते ही इसको गति देने का काम प्रारंभ कर दिया। 2800 किलोमीटर के कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेट कॉरपोरेट कॉरिडोर देश के व्यापार कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है। साथियों डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानी ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट दोनों धीमा था। लेकिन डेडीिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर पर हर रोज 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती है। प्रतिदिन 430 मालगाड़ी और पहले जो मालगाड़ी 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफर तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफाई तय कर लेगी। जिस जगह पर ट्रक से सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 10 12 घंटे में पूरी हो जाती है। यानी इस कॉरिडोर पर माल गाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है। किराया भाड़ा का खर्च कम हुआ है। समय बचा है। पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानी इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं। साथियों इस फ्रेट कॉरिडोर से पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसानों की उपज अब तेजी से बड़े बाजार तक पहुंच पा रही है। कई तरह के फूल, कई तरह की सब्जियां, कई तरह के फल यानी जो चीजें मौसम के हिसाब से जल्दी खराब होती है। उनके लिए भी सही समय पर मंडियों और लोगों के बीच पहुंचने का रास्ता बना है। इससे किसान का बहुत बड़ा फायदा हुआ है। साथियों, यह फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में जेएनपीटी मुंबई जेएनपीटी पोर्ट से बड़ोदरा तक डबल स्टक कंटेनर मालगाड़ी का संचालन किया गया है। यानी डिब्बे के ऊपर एक और डिब्बा लगाकर मालगाड़ी को चलाया गया। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वड़ोदरा चला आया। 250 ट्रक अब ये जो नाराज फूफा जी है वो चिल्लाएंगे के ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा है उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया। यानी अब बड़ी मात्रा में सामान तेजी से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा। साथियों फ्रेट कॉरिडोर के साथसाथ अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है जहां इतने दशकों तक नहीं पहुंची थी। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, यहां जो आदिवासी क्षेत्र हैं वे भी इस प्रोजेक्ट के द्वारा रेल से जुड़ रहे हैं। पहले की सरकार में बजट में एक दो ट्रेनों की घोषणा होती थी। और उसके भी साल भर ढोल पीटे जाते थे। जबकि आज देश में साल भर एक के बाद एक नई ट्रेनें चलाई जा रही है। आज भी इस कार्यक्रम में कई नई ट्रेन शुरू हुई है। नई ट्रेन से वड़ोदरा छोटा उदयपुर और अलीराजपुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी। साथियों रोड, रेल, मेट्रो, एयरपोर्ट, गैस पाइप लाइन, गरीबों का घर जब देश में करोड़ों लोगों के लिए चीजें बनती हैं। इससे लोगों का जीवन आसान होता है और साथ ही छोटे से बड़े कामगार को रोजगार के लाखों लाख अवसर मिलते हैं। आप रेलवे का ही देखिए इस वर्ष का रेल बजट पौने लाख करोड़ से अधिक रहा है। यह 12 वर्ष पहले की तुलना में कई गुना अधिक है। यानी रेलवे के आधुनिकरण पर हो रहा खर्च हजारों हजार नए रोजगार बना रहा है। और ये रोजगार कंस्ट्रक्शन के दौरान तो बनता ही है। एक बार रोड, रेल, पाइपलाइन, पोर्ट, एयरपोर्ट बन गया तो फिर उसके आसपास नए उद्योग लगना शुरू हो जाते हैं। नए बिजनेस आते हैं। यह फिर नए रोजगार बनाते हैं। वहां कुछ लोग वो बेटी चित्र ले कब से खड़ी है। वह सज्जन भी कुछ कला लेकर के आए हैं। जरा हमारे साथी उसको कलेक्ट कर लें। ये आगे पहुंचा दीजिए। हां। एक और भी है कोई? हां, ले लीजिए। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। साथियों मैंने देश के सामने विकसित भारत की जिन सप्त धाराओं का विज़न रखा है उनमें एक धारा मैन्युफैक्चरिंग की भी है और वड़ोदरा शहर इसकी ताकत अच्छे से जानता भी है। समझता भी है। एजुकेशन स्किल और इंडस्ट्री का कॉलेब कैसे होता है? यह बड़ोदरा करीब 150 साल से इसका प्रतिबिंब है। दशकों पहले यहां टेक्सटाइल और टाइल्स के निर्माण से एक यात्रा शुरू हुई थी। जो बाद में ऑयल और पेट्रोकेमिकल्स के साथ आगे बढ़ी। पिछले दो ढाई दशक में वड़ोदरा एमएसएम का एक बड़ा हब बन गया है और मुझे याद है जब मैं नया-नया मुख्यमंत्री बना था तो वड़ोदरा का मेरे पर स्पेशल अधिकार रहा है हमेशा तो हर हफ्ते कोई न कोई डेलीगेशन आता था। बस हमारे वड़ोदरा में कुछ मैन्युफैक्चरिंग का हो, मैन्युफैक्चरिंग का हो क्योंकि यहां पर आते थे तो या तो ज्योति या एलएमबी या तो जीएसएफसी यही सब दिखता था और कुछ सुनता नहीं देता। आज कहां से कहां बदल गया। अब तो यह शहर देश के पहले मेड इन इंडिया मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी जाना जा रहा है। C295 एयरक्राफ्ट की पहली फ्लाइट यहां आसमान देख चुकी है। मैं वड़ोदरा के लोगों को यह गौरव पाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। साथियों जब देश की मैन्युफैक्चरिंग की बात हो रही है तो मैं एक और आंकड़ा बताना चाहता हूं। बीते एक दशक में भारत रेल कोच मेट्रो कोच बनाने का रेल इंजन बनाने का भी एक बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद से अब तक भारत ने करीब 5000 ये आंकड़ा सुनिए 2014 के बाद भारत ने अब तक 5000 आधुनिक रेल कोच बनाए हैं। पुरानी सरकार 10 साल में 50,000 टॉयलेट नहीं बना सकती थी। 5000 आधुनिक कोच तो किए ही करीब ढाई लाख वैगन मालगाड़ी के लिए जो वैगन होते हैं भारतीय रेल में जोड़े गए हैं। ढाई लाख साथियों अब भारत चीप से लेकर शिप तक निर्माण की एक नई गाथा लिख रहा है। यानी पुरजे भी हमारे और प्रोडक्ट भी हमारा आत्मनिर्भरता की पूरी चैन भारत में ही बनेगी। और यह हम सोलर पावर के मामले में देख रहे हैं। जैसे कड़ाना डैम पर जो फ्लोटिंग सोलर प्लांट प्रोजेक्ट है। कुछ साल पहले तक देश में सोलर प्रोजेक्ट लगाने बहुत महंगे पड़ते थे। क्योंकि पीवी मॉड्यूल से लेकर हर प्रकार का हार्डवेयर इंपोर्ट करना पड़ता था। लेकिन बीते वर्षों में हमने भारत में ही पीवी मॉड्यूल बनाने शुरू किए। और आज हम इसमें 200 गीगावाट से ज्यादा की कैपेसिटी विकसित कर चुके हैं। और ऐसी ही आत्मनिर्भरता के कारण आज पीएम सूर्यघर मुक्त बिजली योजना का विस्तार हो रहा है। अब तक देश में 55 लाख परिवार अपने छत पर टेरेस पर सोलर प्लांट लगा चुके हैं। और इसमें 11 लाख परिवार हमारे गुजरात के हैं। यहां इतने सारे परिवार बिजली उत्पादक बन चुके हैं। और इसके कारण प्रोडक्शन से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विस तक कितने ही युवाओं को रोजगार मिला है। कितने नए वेंडरर्स आए हैं। साथियों, झूठ की गुंज से भरमाने वाले तो हर चौराहे पर मिल जाएंगे। लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है। सच की हुंकार के साथ चलता है। सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी यह देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर पर सरकार कितना फोकस से काम कर रही है। साथियों आने वाले दौर में हर आधुनिक सेक्टर बिजली से ही चलेगा। इलेक्ट्रिक इको सिस्टम पर निर्भर होगा। जैसे चीप इंडस्ट्री है, डाटा सेंटर और एआई से जुड़ी इंडस्ट्री है। इनका खाद पानी बिजली ही है। इसलिए अगर हमें एआई में दुनिया के सामने सुपर पावर बनना है तो देश को उसकी तैयारी उसका इको सिस्टम भी बनाना होगा। यही काम भारत ग्राउंड पर कर रहा है। तभी किसी देश से यूरेनियम के लिए समझौते हो रहे हैं। किसी से क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर समझौते किए जा रहे हैं। ये सारी मेहनत देश के युवाओं के फ्यूचर सुरक्षित करने के लिए दिन रात मेहनत करके की जा रही है। आपके भविष्य के लिए किया जा रहा है। साथियों दुनिया तेजी से बदल रही है तो दुनिया की जरूरतें भी बदल रही है। और इसी प्रकार हमारी पढ़ाई लिखाई के तौर तरीके भी बदल रहे हैं। पहले फोकस सिर्फ डिग्री पर होता था। लेकिन अब डिग्री के साथसाथ किस स्किल पर भी फोकस है। स्किल का महत्व बढ़ रहा है। नौजवानों के पास स्किल हो और वो स्किल समय-समय पर अपग्रेड हो एक बहुत बड़ी जरूरत बन गई है। और इसलिए आज हम अपनी शिक्षा नीति को शिक्षण और ट्रेनिंग के संस्थानों को नए रूप में ढाल रहे हैं। और इसी भाव के साथ ही मैंने लाल किले से भी युवा शक्ति के लिए दो बड़ी घोषणाएं की है। पहली घोषणा देश की पारंपरिक जरूरत से जुड़ी है। आप सब जानते हैं कि हमारे यहां लाखों नौजवान ऐसे हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। हर साल हमारे मिडिल क्लास परिवारों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन बच्चों की कोचिंग पर खर्च हो जाता है। हमारी कोशिश है कि गरीब और मिडिल क्लास के बच्चे की परिवारों के पैसों की बचत हो। और इसलिए अब सरकार स्टूडेंट्स को ऑनलाइन फ्री कोचिंग व्यवस्था देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। और हिंदुस्तान के बेस्ट टीचर के द्वारा उनकी कोचिंग हो। हमारे जो नौजवान अपनी तैयारी कर रहे हैं उनकी कोचिंग का ध्यान सरकार खुद रखेगी। साथियों भारत के नौजवानों को AI में पारंगत होना उतना ही जरूरी है। हम चाहते हैं कि हमारे नौजवानों की पीढ़ी एआई के लिए तैयार हो। ऐसा नहीं है। एआई सीखने वालों की जरूरत सिर्फ आईटी सेक्टर में है। अगर कोई स्किल को जानता है तो वह खेती के लिए नया एआई सॉल्यूशन बना सकता है। आरोग्य के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी विकसित कर सकता है। मैन्युफैक्चरिंग की प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है। रोबोटिक्स में अपना स्टार्टअप शुरू कर सकता है। इसलिए जरूरी है कि हमारे पास देश और दुनिया की इंडस्ट्री के लिए एआई को समझने वाले और एआई का इस्तेमाल करने वाले युवा हो। सरकार इसके लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। साथियों, भारत का यह कालखंड अभूतपूर्व है। यह भारत की युवा शक्ति का उत्कर्ष काल है। यह समय फिर भारत के जीवन में लौट कर नहीं आएगा और इसलिए हमें 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को सर्वोपरि रखना है। हमें भारत को विकसित बनाकर ही रहना है। इसी आह्वान के साथ एक बार फिर आप सभी को विकास कार्यों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। अब मारू एक काम कर प वड़ोदरा वाला करो पाके पाए तमे वड़ोदरा अट स्वच्छ बनावी दीद किली बदी मेहनत कर पड़ी जो दिवस रात सफाई माला पर एक बार आपने नक्की करिए के हवे आपने वड़ोदरा ने गंदू थवा न दे हु पोते गंदगी नहीं करूं आ संकल्प करिए तो वड़ोदरा गंदू थाए वड़ोदरा गंदू थाए तो दिवाली आवी चकाचक जाए कि ना जाए नवरात्रि शानदार जाए कि ना जाए गणोत्सव मा चार चार लागे कि ना लागे तो काम थसे शाबाश धन्यवाद भारत माता की जय भारत माता की जय वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे मातरम् वंदे मातरम वंदे मातरम वंदे वंदे मातरम