India’s freight revolution is here! Witness how Vadodara is stepping up the game...
साथियों इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गति शक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गति शक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड थ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई है। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडीिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। यह 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है। साथियों यह डडीिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है? इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं। जब इसका विचार शुरू हुआ। आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा। उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रही। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी। और दुर्भाग्य देखिए इन फाइलों को भी कोई डडीिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ। फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थी, लटकती थी, भटकती थी। और 2014 में बड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल के दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई और सच्चाई यह थी कि सात आठ वर्ष में जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए याद रखिए सात आठ वर्ष में एक किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर का पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते तो पता नहीं आपके बाद तीन चार पीढ़ियां आती तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक इको सिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की यह हालत करके रखी थी। साथियों 2014 के बाद आपने जो मुझे शिक्षा दीक्षा दी थी इस धरती ने मुझे जो सिखाया था आपके पास से जो लेसन ले मैं दिल्ली पहुंचा था। हमने वहां पहुंचते ही इसको गति देने का काम प्रारंभ कर दिया। 2800 किलोमीटर के कॉरिडोर का काम आज पूरा करके दिखाया और आज ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेट कोपरेट कॉरिडोर देश के व्यापार कारोबार का मुख्य आधार बन रहा है। साथियों डडीिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तेजी से विकसित होते भारत की जीवन रेखा है। इसने भारत के ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर का कायाकल्प कर दिया है। पहले पैसेंजर ट्रेन जिस ट्रैक पर चलती थी उसी ट्रैक पर मालगाड़ी भी चलती थी। यानी ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट दोनों धीमा था। लेकिन डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने स्थिति को बदल दिया है। आज पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर पर हर रोज 430 से ज्यादा मालगाड़ियां चलती हैं। प्रतिदिन 430 मालगाड़ी और पहले जो मालगाड़ी 6 घंटे में 100 किलोमीटर का सफर तय करती थी और अब वही मालगाड़ी आधे से भी कम समय में 100 किलोमीटर का सफाई तय कर लेगी जिस जगह पर ट्रक से सामान सामान भेजने में सामान्य तौर पर 30 घंटे लगते हैं। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर यही दूरी 101 घंटे में पूरी हो जाती है। यानी इस कॉरिडोर पर मालगाड़ी के चलने से ट्रक और ट्रेन में लगने वाला फ्यूल बचता है। किराया भाड़ा का खर्च कम हुआ है। समय बचा है। पर्यावरण को फायदा हुआ है। यानी इन्वेस्टमेंट एक ट्रैक पर किया और फायदे अनेक सारे हुए हैं। साथियों इस फ्रेट कॉरिडोर से पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसानों की उपज अब तेजी से बड़े बाजार तक पहुंच पा रही है। कई तरह के फूल, कई तरह की सब्जियां, कई तरह के फल यानी जो चीजें मौसम के हिसाब से जल्दी खराब होती हैं। उनके लिए भी सही समय पर मंडियों और लोगों के बीच पहुंचने का रास्ता बना है। इससे किसान का बहुत बड़ा फायदा हुआ है। साथियों यह फ्रेट कॉरिडोर एक और वजह से कमाल का है। हाल ही में जेएनपीटी मुंबई जेएनपीटी पोर्ट से बड़ोदरा तक डबल स्टक कंटेनर मालगाड़ी का संचालन किया गया है। यानी डिब्बे के ऊपर एक और डिब्बा लगाकर मालगाड़ी को चलाया गया। इस मालगाड़ी के चलने से एक बार में ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर का सामान मुंबई से वड़ोदरा चला आया। 250 ट्रक अब यह जो नाराज फूफा जी है वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा? ट्रक कहां जाएंगे? जिन्होंने ट्रक खरीदा है उनका क्या होगा? अब फूफा जी को काम मिल गया। यानी अब बड़ी मात्रा में सामान तेजी से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच पाएगा। साथियों फ्रेट कॉरिडोर के साथसाथ अब भारत में रेल वहां भी पहुंच रही है जहां इतने दशकों तक नहीं पहुंची थी। गुजरात हो, मध्य प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, यहां जो आदिवासी क्षेत्र हैं वे भी इस प्रोजेक्ट के द्वारा रेल से जुड़ रहे हैं। पहले की सरकार में बजट में एक दो ट्रेनों की घोषणा होती थी। और उसके भी साल भर ढोल पीटे जाते थे। जबकि आज देश में साल भर एक के बाद एक नई ट्रेनें चलाई जा रही है। आज भी इस कार्यक्रम में कई नई ट्रेन शुरू हुई है। नई ट्रेन से वड़ोदरा, छोटा उदयपुर और अलीराजपुर के लोगों को बहुत सुविधा होगी।