Speech
Narendra Modi  ·  2026-09-08 00:00

India's manufacturing 'Saptadhara' paves the way for Aatmanirbhar & Viksit Bharat...

साथियों मैंने देश के सामने विकसित भारत की जिन सप्त धाराओं का विज़न रखा है उनमें एक धारा मैन्युफैक्चरिंग की भी है। और वड़ोदरा शहर इसकी ताकत अच्छे से जानता भी है, समझता भी है। एजुकेशन स्किल और इंडस्ट्री का कॉलेब कैसे होता है? यह बड़ोदरा करीब 150 साल से इसका प्रतिबिंब है। दशकों पहले यहां टेक्सटाइल और टाइल्स के निर्माण से एक यात्रा शुरू हुई थी जो बाद में ऑयल और पेट्रोकेमिकल्स के साथ आगे बढ़ी। पिछले दो ढाई दशक में वड़ोदरा एमएसएम का एक बड़ा हब बन गया है और मुझे याद है जब मैं नया-नया मुख्यमंत्री बना था तो वड़ोदरा का मेरे पर स्पेशल अधिकार रहा है हमेशा तो हर हफ्ते कोई न कोई डेलीगेशन आता था बस हमारे वड़ोदरा में कुछ मैन्युफैक्चरिंग का हो मैन्युफैक्चरिंग का हो क्योंकि यहां पर आते थे तो या तो ज्योति या एल एलएमबी या तो जीएसएफसी यही सब दिखता था और कुछ सुनता नहीं देता। आज कहां से कहां बदल गया? अब तो यह शहर देश के पहले मेड इन इंडिया मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भी जाना जा रहा है। C295 एयरक्राफ्ट की पहली फ्लाइट यहां आसमान देख चुकी है। मैं वडोदरा के लोगों को यह गौरव पाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। साथियों जब देश की मैन्युफैक्चरिंग की बात हो रही है तो मैं एक और आंकड़ा बताना चाहता हूं। बीते एक दशक में भारत रेल कोच मेट्रो कोच बनाने का रेल इंजन बनाने का भी एक बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद से अब तक भारत ने करीब 5000 ये आंकड़ा सुनिए 2014 के बाद भारत ने अब तक 5000 आधुनिक रेल कोच बनाए हैं। पुरानी सरकार 10 साल में 50,000 टॉयलेट नहीं बना सकती थी। 5000 आधुनिक कोच तो किए ही करीब ढाई लाख वैगन मालगाड़ी के लिए जो वैगन होते हैं भारतीय रेल में जोड़े गए हैं। ढाई लाख साथियों अब भारत चीप से लेकर शिप तक निर्माण की एक नई गाथा लिख रहा है। यानी पुरजे भी हमारे और प्रोडक्ट भी हमारा। आत्मनिर्भरता की पूरी चैन भारत में ही बनेगी। और यह हम सोलर पावर के मामले में देख रहे हैं। जैसे कड़ाना डैम पर जो फ्लोटिंग सोलर प्लांट प्रोजेक्ट है। कुछ साल पहले तक देश में सोलर प्रोजेक्ट लगाने बहुत महंगे पड़ते थे। क्योंकि पीवी मॉड्यूल से लेकर हर प्रकार का हार्डवेयर इंपोर्ट करना पड़ता था। लेकिन बीते वर्षों में हमने भारत में ही पीवी मॉड्यूल बनाने शुरू किए। और आज हम इसमें 200 गीगावाट से ज्यादा की कैपेसिटी विकसित कर चुके हैं। और ऐसी ही आत्मनिर्भरता के कारण आज पीएम सूर्यघर मुक्त बिजली योजना का विस्तार हो रहा है। अब तक देश में 55 लाख परिवार अपने छत पर टेरेस पर सोलर प्लांट लगा चुके हैं। और इसमें 11 लाख परिवार हमारे गुजरात के हैं। यहां इतने सारे परिवार बिजली उत्पादक बन चुके हैं। और इसके कारण प्रोडक्शन से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विस तक कितने ही युवाओं को रोजगार मिला है। कितने नए वेंडरर्स आए हैं। साथियों, झूठ की गुंज से भरमाने वाले तो हर चौराहे पर मिल जाएंगे। लेकिन भारत का नौजवान सच की हुंकार से चलता है। सच की हुंकार के साथ चलता है। सच की हुंकार के लिए चलता है। हमारे युवा साथी ये देख रहे हैं कि आज देश में सोलर हो, विंड हो, हाइड्रो हो, न्यूक्लियर हो, सारे सेक्टर पर सरकार कितना फोकस से काम कर रही है। साथियों आने वाले दौर में हर आधुनिक सेक्टर बिजली से ही चलेगा। इलेक्ट्रिक इको सिस्टम पर निर्भर होगा। जैसे चीप इंडस्ट्री है, डाटा सेंटर और एआई से जुड़ी इंडस्ट्री है। इनका खाद पानी बिजली ही है। इसलिए अगर हमें एआई में दुनिया के सामने सुपर पावर बनना है तो देश को उसकी तैयारी उसका इको सिस्टम भी बनाना होगा। यही काम भारत ग्राउंड पर कर रहा है। तभी किसी देश से यूरेनियम के लिए समझौते हो रहे हैं। किसी से क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर समझौते किए जा रहे हैं। ये सारी मेहनत देश के युवाओं के फ्यूचर सुरक्षित करने के लिए दिन रात मेहनत करके की जा रही