Speech
Narendra Modi  ·  2026-09-08 00:00

PM Modi's speech during the inauguration of Global Fintech Fest GFF 2026

आरबीआई के गवर्नर श्री संजय मल्होत्रा जी ग्लोबल फिनटेक फेस के चेयरमैन क्रिश गोपाला कृष्णन जी फिनटेक वर्ल्ड के सभी इनोवेटर्स लीडर्स और इन्वेस्टर्स देवियों और सज्जनों ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में देश विदेश से आए सभी गेस्ट और डेलीगेट्स का मैं अभिनंदन करता हूं। मुझे खुशी है आज यहां एक और हैट्रिक लगी है। एक हैट्रिक तो 2024 में तीसरी बार सरकार बनने से लगी थी और यह हैट्रिक आप सभी के बीच आने से जुड़ी है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में लगातार यह मेरा थर्ड ईयर है। यह हैट्रिक बताती है। कि विकसित भारत के लिए आप कितने महत्वपूर्ण है। आपका काम कितना महत्वपूर्ण है। साथियों हर बार जब मैं यहां आता हूं तो मुझे पहले से ज्यादा युवा दिखाई देते हैं। पहले से ज्यादा एनर्जी अनुभव होती है। मुझे पॉसिबिलिटीज का दायरा एक्सपेंड होता दिखता है। यह साफसाफ लगता है कि रिस्क टेकिंग कैपेसिटी बढ़ रही है ड्रीम्स और बोल्ड हो रहे हैं और इसलिए विकसित भारत के फ्यूचर को लेकर मेरा विश्वास और मजबूत हो रहा है। साथियों फिनटेक की इस एनर्जी के बीच ही मुंबई में सांस्कृतिक ऊर्जा भी इन दिनों चरम पर है। कुछ ही दिनों में महाराष्ट्र सहित पूरे देश में गणेशोत्सव शुरू होने जा रहा है। हमारे यहां हर शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश को याद किया जाता है। मैं गणपति बाप्पा को नमन करते हुए आप सभी को ग्लोबल फिनटेक फैस 2026 के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। साथियों, दुनिया के हालात क्या है? यह आप सब भलीभांति जानते हैं। दुनिया कॉन्फ्लिक्ट और अनसर्टेनिटी के दौर से गुजर रही है। एनर्जी और कमोडिटीज की सप्लाई चेस पर दबाव है। ट्रेड को लेकर भी तनाव है। और यह स्थितियां कई महीनों से बनी हुई है। इसमें भी अप्रैल से जून का क्वार्टर सबसे चैलेंजिंग रहा है। और इसमें भी जब भारत 7.8% से ग्रो करता है तो दुनिया को एक नया भरोसा मिलता है। और यह जो विश्वास है वह मैं यहां आप सभी के चेहरों पर भी साफ-साफ देख रहा हूं। साथियों भारत पर इस बढ़ते भरोसे का एक और उदाहरण हमारी सोवन रेटिंग्स भी है। हाल में ही जापान की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की सोवन रेटिंग्स को एक कैटेगरी में अपग्रेड किया है। अपग्रेड करना तो खुशी की बात है। लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि सौभाग्य तीन दशक के बाद आया है। 30 साल के बाद यह दिखाता है कि भारत के ग्रोथ मोमेंटम हमारी मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी और जो स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स बीते वर्षों में किए हैं उन सबको लेकर दुनिया कितनी आश्वस्त है और मैं फिर कहूंगा होगा कि भारत की यह रिफॉर्म एक्सप्रेस और तेज रफ्तार से आगे बढ़ेगी। साथियों भारत की फिनटेक स्टोरी अद्भुत रही है। और इसका एक बड़ा चैंपियन है हमारा यूपीआई। मैंने पिछले साल भी इसकी चर्चा की थी। लेकिन यह इतनी बड़ी ट्रांसफॉर्मेशन है कि जब भी फिनटेक की चर्चा होगी तो वह यूपीआई के बिना अधूरी ही होगी। साथियों अभी कुछ ही दिन पहले 25 अगस्त को यूपीआई ने अपने 10 साल पूरे किए हैं। 10 वर्ष पहले जब मैं कहता था कि आपका बैंक आपकी फिंगर टिप्स पर होगा तो कुछ लोगों को यह असंभव लगता था और मैं वेल इनफॉर्म लोगों की बात कर रहा हूं। चेहरा याद कर लीजिए। मैं उन करोड़ों भारतीयों की बात नहीं कर रहा हूं जिनके तब बैंक अकाउंट भी नए-नए खुले थे। उनकी तो अनेक पीढ़ियों ने बैंक का दरवाजा तक नहीं देखा था। लेकिन आज 10 वर्ष बाद देखिए वही करोड़ों लोग जो पीढ़ियों से बैंकिंग सिस्टम से बाहर थे वे भारत में फिनटेक ग्रोथ के बड़े ड्राइवर बन गए हैं। साथियों आज अकेले अगस्त महीने में ही यूपीआई से 2400 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शंस हुए हैं। यानी हम यहां जितनी देर से बैठे हैं सिर्फ 10 मिनट में ही औसतन 50 लाख से ज्यादा यूपीआई ट्रांजैक्शन देश भर में हो चुके होंगे। यही इंपैक्ट है जिसके कारण फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो ने कहा उन्होंने कहा था कि यूपीआई केवल टैक्स स्टोरी नहीं है। यह एक सिविलाइजेशनल स्टोरी है। और साथियों यूपीआई अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कुछ वर्ष पहले यहां कोई कहता कि विदेश में भी भारत के बैंक अकाउंट से पेमेंट कर देगा तो शायद ही कोई विश्वास करता हो। लेकिन आज यह एक हकीकत है। भारत का यूपीआई अब दुनिया के 11 देशों में लाइव है। यह अद्भुत आंकड़े हैं जो हमें बताते हैं कि हमने कितना लंबा सफर तय किया है। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या हम इस सफर से संतुष्ट हो जाए? क्या भारत में फिनटेक की सफलता को ही फाइनल मान लिया जाए? साथियों, पॉलिसी और गवर्नन से जुड़े इको सिस्टम में मुझे अब 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं। और जिन्होंने भी मुझे इन वर्षों में देखा है, वह जानते हैं मोदी एक पड़ाव पर पहुंचकर जश्न मनाकर संतुष्ट होने वालों में से नहीं है। जब एक लक्ष्य प्राप्त होता है तो मैं उससे भी बड़े लक्ष्य की तैयारी में जुट जाता हूं। साथियों आज हमारा यूपीआई कई देशों में पहुंचा है। लेकिन यह फर्स्ट स्टेप है। अब उन देशों के पेमेंट सिस्टम के साथ जुड़ना हमारा अगला लक्ष्य होना चाहिए। सिंगापुर के साथ हम यह कर चुके हैं। इससे भारत और सिंगापुर के बीच ट्रांजक्शन वैसे ही हो पा रहे हैं जैसे एक ही शहर के दो मोहल्लों के बीच होता है। यही कनेक्शन हमें अन्य देशों अन्य बाजारों में भी बिल्ड करना है। इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ना होगा। जहां भी भारतीय बड़ी संख्या में रहते हैं, जहां भी भारत बड़े पैमाने पर ट्रेड करता है, दुनिया का जो भी देश हमारे साथ चलने को तैयार है, हमें उन सबको जोड़ने के लिए काम करना होगा। साथियों, यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि विदेशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और दुनिया में सबसे अधिक भारतीय ही विदेश से पैसा भेजते हैं। लेकिन आज उस पैसे का एक हिस्सा ट्रांजैक्शन कॉस्ट में चला जाता है। यूपीआई भारतीयों को इसमें भी बचत दिला सकता है। और पैसा तेजी से भारतीय परिवारों के पास पहुंच सकता है। साथियों आज आप भारत में कार्ड से पेमेंट कैसे करते हैं? यह सिस्टम उन स्टैंडर्ड्स पर चलता है जो कहीं और डिजाइन किए गए थे। हमने उन स्टैंडर्ड्स और रूल्स को अपनाया जो दूसरों ने बनाया था। उस समय हमारे पास अपना कोई विकल्प नहीं था। लेकिन अब हमारे पास अपना विकल्प है। अब हम अपने खुद के रूल्स और स्टैंडर्ड बना सकते हैं और उन्हें दुनिया के साथ जोड़ सकते हैं। मुझे आप सभी पर पूरा भरोसा है कि आप यह कर सकते हैं। साथियों टेक्नोलॉजी इंक्लूजन का सबसे प्रभावी टूल है और यूपीआई ने करके दिखाया है। जब फिनटेक की बात आती है तो इसका यूनिक फीचर ही वहां पहुंचने का होना चाहिए। जहां ट्रेडिशनल मॉडल नहीं पहुंच पाए। जहां पारंपरिक बैंक नहीं पहुंच पाए। जहां बैंक ब्रांच नहीं पहुंच पाई। यूपीआई ने बैंकिंग व्यवस्था को उस स्थान उस व्यक्ति तक पहुंचा दिया है। साथियों आज फinटेक बाजार का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पेमेंट्स का है। लेकिन अब हमें यहां से नेक्स्ट लेवल पर ले जाना है और तेजी से जाना है। अब फinटेक मार्केट में पेमेंट्स के साथसाथ क्रेडिट ट्रांजक्शन का हिस्सा भी बढ़ना चाहिए। इंश्योरेंस का हिस्सा बढ़ना चाहिए। सेविंग्स, इन्वेस्टमेंट्स और पेंशन का हिस्सा बढ़ना चाहिए। साथियों, मैं समझता हूं फिनटेक देश की उस ताकत को उभार सकता है जो अभी ट्रेडिशनल फाइनेंसियल मॉडल्स की रीच से बाहर है। या उस प्रकार से एड्रेस नहीं हो पा रही है। विकसित भारत के लिए इस ताकत का उभार बहुत जरूरी है। साथियों इसका इफेक्ट इंपैक्ट क्या होता है? यह हम सभी पीएम स्वनिधि की सफलता से देख ही रहे हैं। हमारे स्ट्रीट वेंडरर्स शहरों की रीड है। लेकिन यह देश के बैंकिंग सिस्टम से फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम से बाहर थे। पीएम स्वनिधि ने देश के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को फॉर्मल सिस्टम से जोड़ा। और अब इन साथियों के पास भी स्वनिधि क्रेडिट कार्ड है। यानी इनके पास एक फॉर्मल क्रेडिट एक्सेस का टूल है। और स्टडीज बताती है कि स्वनिधि के इन बेनिफिशरीज की एवरेज एनुअल इनकम 20% से ज्यादा बढ़ी है। यही नहीं इससे इन परिवारों की हाउसिंग, न्यूट्रिशन, हेल्थ केयर एक्सेस और बच्चों की एजुकेशन इनमें भी बहुत सुधार हुआ है। इसलिए सरकार ने स्कीम को 2030 तक बढ़ाने का फैसला भी लिया है। साथियों, पीएम स्वनिधि को यह सफलता हासिल ही नहीं होती। अगर यूपीआई ही ना होता। इस स्कीम की सफलता में यूपीआई की एक बहुत बड़ी भूमिका है। इसी अनुभव से सीखते हुए हमें फिनटेक की ताकत से इकोनॉमिक एक्टिविटीज को और बढ़ाना है। मैं आपको कैपिटल और क्रेडिट की दुनिया से एक उदाहरण देता हूं। एक बहन है जो छोटी दुकान चलाती है। उसको हर दिन डिजिटल पेमेंट मिलता है। अब उसकी इनकम और खर्च में एक क्लियर पैटर्न दिखता है। उसका बिजनेस काफी अच्छा चल रहा है। वो उस लेवल से आगे बढ़ चुकी है जहां कम कैपिटल भी काफी था। अब उसे अपने बिजनेस को स्केल अप करने के लिए सामान चाहिए, इक्विपमेंट चाहिए और इसके लिए थोड़े ज्यादा पैसों की जरूरत है। यह बहुत बड़ा क्रेडिट नहीं है और उस बहन का बिजनेस अभी भी इतना छोटा है कि ट्रेडिशनल क्रेडिट मॉडल उसको एफिशिएंट सर्विस नहीं दे सकते। इस प्रकार के बिजनेस है जिनकी जरूरतों को फिनटेक एनालाइज एंटीिसिपेट और एड्रेस कर सकते हैं। और ऐसे बिजनेस की संख्या बहुत बड़ी है। साथियों टेक्नोलॉजी हमें ऐसे बिजनेसेस की इकोनॉमिक एक्टिविटीज को स्टडी करने और उनके लिए क्यूरेटेड मॉडल डिजाइन करने में बहुत काम आ सकती है। मेरा मानना है कि फिनटेक का नेक्स्ट चैप्टर यही लिखा जाएगा। हमने पेमेंट्स में स्पीड और स्केल दिखाई है। अब हमें नॉन पेमेंट्स ट्रांजैक्शन का शेयर बढ़ाने में मदद करनी होगी। जैसे कोई डिलीवरी पार्टनर है या अपना कोई छोटा-मोटा काम करने वाला व्यक्ति है वो हर महीने कमाता है। लेकिन उसे सेविंग्स और पेंशन प्रोडक्ट जैसी सर्विज तक एक्सेस चाहिए। ऐसे लोगों की जरूरतों को फिनtक एड्रेस कर सकता है। ऐसे ही फिनtक इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स और अन्य फाइनेंसियल सर्विस तक भी एक्सेस आसान बना सकता है। यह सब भी उतने ही सरल, सहज और सुलभ हो सकते हैं जितना आसान आज क्यूआर कोड से पेमेंट करना है। साथियों 21वीं सदी का पहला क्वार्टर खत्म हो चुका है। अब हम साल 2026 में है। अब दूसरा क्वार्टर हमारे लिए और भी नई संभावनाओं लेकर आया है। एजेंटिक एआई टोकनाइजेशन क्वांटम ऐसी टेक्नोलॉजीस फाइनेंशियल सेक्टर में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। अब हमारे सामने चुनौती है। इन संभावनाओं को वास्तविक इंपैक्ट में कैसे बदले और इसके लिए मैं चाहता हूं हमारी फिनटेक कंपनियां साथ मिलकर कुछ टास्क अपने लिए सेट करें और इसके लिए मैं कुछ सुझाव भी आपके बीच रखना चाहता हूं। पहला हमें भारत में साइबर सिक्योरिटी को टॉप नच बनाना है। दूसरा हमारी इंडस्ट्री के पास अपने एथिकल डाटा प्रोटेक्शन स्टैंडर्ड्स होने चाहिए। तीसरा हमें एक मजबूत फिनटेक रेगुलेटर इंडस्ट्री इनोवेशन इकोस सिस्टम बनाना है और चौथा हमारे पास एक फिनटेक कंज्यूमर प्रोटेक्शन इंडेक्स होना चाहिए जिसके आधार पर हर कंपनी की पारदर्शी रेटिंग हो सके। अगर हम इन कसटियों पर खुद को कसेंगे तो भारत का फिनटेक सेक्टर असंख्य पॉसिबिलिटीज का गेटवे बन सकता है। हमारे पास अनुभव भी है। उसे जमीन पर उतारने का तरीका भी है। इसलिए हमें तेजी से काम करना है। साथियों डिजिटल इंडिया की सक्सेस स्टोरी अब एक नए अध्याय के लिए तैयार है। हमारी फिनटेक सक्सेस स्टोरी की अब तक की सफलता स्केल है। स्कोप है। सिक्योर सिस्टम है। डेमोक्रेटाइजेशन ऑफ टेक्नोलॉजी है। और जनता का ट्रस्ट है। इन्हीं कोर वैल्यूस को ध्यान में रखते हुए फिनटेक सेक्टर को नेक्स्ट जनरेशन इनोवेशन पर फोकस करना है। इसी आग्रह के साथ आप सभी को एक बार फिर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।