Speech
Narendra Modi  ·  2026-09-08 00:00

Listen to PM Modi as he takes immense pride in UPI's remarkable success in 10 years!

साथियों भारत की फिनटेक स्टोरी अद्भुत रही है और इसका एक बड़ा चैंपियन है हमारा यूपीआई। मैंने पिछले साल भी इसकी चर्चा की थी। [प्रशंसा] लेकिन ये इतनी बड़ी ट्रांसफॉर्मेशन है कि जब भी फिनटेक की चर्चा होगी तो वह यूपीआई के बिना अधूरी ही होगी। [प्रशंसा] साथियों अभी कुछ ही दिन पहले 25 अगस्त को यूपीआई ने अपने 10 साल पूरे किए हैं। 10 वर्ष पहले जब मैं कहता था कि आपका बैंक आपकी फिंगर टिप्स पर होगा तो कुछ लोगों को यह असंभव लगता था और मैं वेल इनफॉर्म लोगों की बात कर रहा हूं। चेहरा याद कर लीजिए। मैं उन करोड़ों भारतीयों की बात नहीं कर रहा हूं जिनके तब बैंक अकाउंट भी नए-नए खुले थे। उनकी तो अनेक पीढ़ियों ने बैंक का दरवाजा तक नहीं देखा था। लेकिन आज 10 वर्ष बाद देखिए वही करोड़ों लोग जो पीढ़ियों से बैंकिंग सिस्टम से बाहर थे वे भारत में फिनटेक ग्रोथ के बड़े ड्राइवर बन गए हैं। [प्रशंसा] साथियों आज अकेले अगस्त महीने में ही यूपीआई से 2400 करोड़ से ज्यादा ट्रांजक्शन हुए हैं। यानी हम यहां जितनी देर से बैठे हैं, सिर्फ 10 मिनट में ही औसतन 50 लाख से ज्यादा यूपीआई ट्रांजैक्शन देश भर में हो चुके होंगे। [प्रशंसा] यही इंपैक्ट है। जिसके कारण फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो ने कहा उन्होंने कहा था कि यूपीआई केवल टैक्स स्टोरी नहीं है। यह एक सिविलाइजेशनल स्टोरी है। और साथियों यूपीआई अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। कुछ वर्ष पहले यहां कोई कहता कि विदेश में भी भारत के बैंक अकाउंट से पेमेंट कर देगा तो शायद ही कोई विश्वास करता हो। लेकिन आज यह एक हकीकत है। भारत का यूपीआई अब दुनिया के 11 देशों में लाइव है। यह अद्भुत आंकड़े हैं जो हमें बताते हैं। कि हमने कितना लंबा सफर तय किया है। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या हम इस सफर से संतुष्ट हो जाए? क्या भारत में फिनटेक की सफलता को ही फाइनल मान ले जाए? साथियों, पॉलिसी और गवर्नन से जुड़े इको सिस्टम में मुझे अब 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं। [प्रशंसा] और जिन्होंने भी मुझे इन वर्षों में देखा है, वह जानते हैं मोदी एक पड़ाव पर पहुंचकर जश्न मनाकर संतुष्ट होने वालों में से नहीं है। [प्रशंसा] जब एक लक्ष्य प्राप्त होता है तो मैं उससे भी बड़े लक्ष्य की तैयारी में जुट जाता हूं। साथियों, आज हमारा यूपीआई कई देशों में पहुंचा है। लेकिन यह फर्स्ट स्टेप है। अब उन देशों के पेमेंट सिस्टम के साथ जुड़ना हमारा अगला लक्ष्य होना चाहिए। सिंगापुर के साथ हम यह कर चुके हैं। इससे भारत और सिंगापुर के बीच ट्रांजक्शन वैसे ही हो पा रहे हैं जैसे एक ही शहर के दो मोहल्लों के बीच होता है। यही कनेक्शन हमें अन्य देशों अन्य बाजारों में भी बिल्ड करना है। इसी लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ना होगा। जहां भी भारतीय बड़ी संख्या में रहते हैं, जहां भी भारत बड़े पैमाने पर ट्रेड करता है, दुनिया का जो भी देश हमारे साथ चलने को तैयार है, हमें उन सबको जोड़ने के लिए काम करना होगा। साथियों, यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि विदेशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और दुनिया में सबसे अधिक भारतीय ही विदेश से पैसा भेजते हैं। लेकिन आज उस पैसे का एक हिस्सा ट्रांजैक्शन कॉस्ट में चला जाता है। यूपीआई भारतीयों को इसमें भी बचत दिला सकता है। और पैसा तेजी से भारतीय परिवारों के पास पहुंच सकता है। साथियों आज आप भारत में कार्ड से पेमेंट कैसे करते हैं? यह सिस्टम उन स्टैंडर्ड्स पर चलता है जो कहीं और डिजाइन किए गए थे। हमने उन स्टैंडर्ड्स और रूल्स को अपनाया जो दूसरों ने बनाया था। उस समय हमारे पास अपना कोई विकल्प नहीं था। लेकिन अब हमारे पास अपना विकल्प है। अब हम अपने खुद के रूल्स और स्टैंडर्ड बना सकते हैं। और उन्हें दुनिया के साथ जोड़ सकते हैं। मुझे आप सभी पर पूरा भरोसा है कि आप यह कर सकते हैं।