Speech
Narendra Modi  ·  2026-08-08 00:00

PM Modi addresses the 57th Convocation Ceremony of the IIT Delhi

शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी जी मेरे मित्र हरीश सालवी जी प्रोफेसर अभय करंदीकर आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रोफेसर रंगन बनर्जी सभी प्रोफेसर्स अन्य महानुभाव और सभी स्टूडेंट साथियों आज देश के आप सभी प्रतिभाशाली युवाओं के जीवन की नई यात्रा शुरू हो रही है। आप इस समय जीवन के एक यादगार मोमेंट को जी रहे हैं। उत्साह, उमंग, सपनों और भावनाओं से सराबोर इस मोमेंट का हिस्सा बनना। आईआईटी दिल्ली के इस कैंपस में आना। आपके साथ यह अनुभव शेयर करना मेरे लिए भी बहुत खास है। पिछली बार जब मैं कन्वोकेशन में शामिल हुआ था तब पूरा देश कोविड के दौर से गुजर रहा था। तब मैं वर्चुअल माध्यम से जुड़ा था। लेकिन मैं आज आप सब युवाओं के बीच उपस्थित हूं। और इसलिए मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है। साथियों आज जैसे आपके परिवार के लोग प्राउड फील कर रहे हैं वैसे ही मुझे भी आप सब पर गर्व है [प्रशंसा] क्योंकि आप सब केवल एक डिग्री नहीं ले रहे हैं। आप देश के लिए बहुत कुछ करने का सपने लेकर के यहां से निकल रहे हैं। आज कई स्टूडेंट्स उनको उनकी उपलब्धियों के लिए मेडल्स में मिले हैं। मैं आप सभी को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। लेकिन एक आध दो बेटियां होती तो जरा ज्यादा अच्छा होता। सॉरी एक दो क्यों ज्यादा होनी चाहिए थी। आज आईआईटी दिल्ली में एआई से जुड़े कुछ नए इनिशिएटिव भी शुरू हुए हैं। मैं इसके लिए भी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। साथियों आज आप सभी और सारे स्टूडेंट्स इस कार्यक्रम में उपस्थित हैं। लेकिन मन के किसी कोने में कुछ और चल रहा होगा। मैं तो बाबा बागेश्वर नहीं हूं। लेकिन कुछ तो चलता होगा। हर स्टूडेंट के मन में आने वाले कल की अपनी-अपनी तस्वीर होगी। कई छात्र अपनी पहली सैलरी का इंतजार कर रहे होंगे। कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी में होगा। कई साथी अपने पहले स्टार्टअप का सपना देख रहे होंगे। किसी ने अगले कॉम्पिटिटिव एग्जाम का लक्ष्य बनाया होगा। हर किसी का रास्ता अलग है। हर किसी का सपना अलग है। लेकिन इन सबके बाद भी एक एहसास ऐसा है जो आप सभी के मन में एक सा होगा। वह दिन याद करिए। जब आपका आईआईटी दिल्ली में पहला दिन था और एक ये आज का दिन है। आप सोच रहे होंगे कि अभी कल की भी तो बात है जब ओरिएंटेशन हुआ था और अब ये कन्वोकेशन का समय भी आ गया तो ओरिएंटेशन से कन्वोकेशन की इस यात्रा का आपको भरपूर सेटिस्फेक्शन भी होगा और साथ ही आप सभी में जीवन के एक नए चैप्टर की शुरुआत का उत्साह भी होगा और इसलिए मैं तो यही कहूंगा आज के इस पल को पूरी तरह जी लीजिए। आने वाले समय में जब आप पर बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां होगी तब यहां की पुरानी यादें आपको पुराने दिनों में जरूर ले जाएगी। यह आपको एनर्जाइज भी करेंग हर हॉस्टल के साथ आपकी मेमोरीज कुमाऊं आरा कारा भिंडी नील कैलाश हिमाद्री [प्रशंसा] इंटर हॉस्टल कंपटीशन के किस्से पुरानी नोकझोंक ऐसा कितना कुछ होगा जो विदा होने से पहले एक बार फिर आप जरूर याद करिए और दोस्तों बात सिर्फ पढ़ाई की नहीं है। यह भी हो सकता है। जीरा सराय का पोहा भी आज कुछ लोगों को बुला रहा हो। [प्रशंसा] [हौसला बढ़ाने की आवाज़] अभी समय तो हो गया है। सतपुरा मैस के पराठे याद आ रहे हो? [प्रशंसा] आप में से कई साथी विंड टी पर भी कुछ और पल भी बिताना चाहते होंगे और विंड टी पर जाए तो मुझे भी याद करना कोई अपने डिपार्टमेंट में एक बार फिर जाना चाहेगा कोई अपने पसंदीदा अड्डे पर कुछ देर और बैठना चाहेगा। और साथियों इन भावुक पलों में मैं एक बात आपसे जरूर कहूंगा। जब जब जीवन आपको पीछे मुड़कर देखने का अवसर देगा तो यह कैंपस लाइफ आपके दोस्त, टीचर्स, मेंटर्स और सपोर्ट स्टाफ जो आपका परिवार बन गए। आपके प्रोफेसर्स जिन्होंने आप जैसी प्रतिभाओं को गढ़ने की जिम्मेदारी उठाई। और आपका यह हिस्ट्री जो धीरे-धीरे आपका अपना घर बन गया। आप अपनी हर सक्सेस में इन सबको याद करेंगे। इन सबके लिए थैंकफुल होंगे और इसलिए इन्हें एक एसेट के तौर पर यहां से लेकर के निकलना। भूल मत जाना, छोड़ मत जाना, साथ ले जाना। मेरा सुझाव होगा कि जाते यहां के हर सदस्य मिलकर के जाइए और आप कहीं भी रहे कोशिश करिएगा यह रिश्ता हमेशा हमेशा ताजा बना रहे। साथियों आज आप ऐसे समय में इस इंस्टट्यूट से निकल रहे हैं जब दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। आज दुनिया की स्ट्रेटेजिक इक्वेशन बहुत तेजी से बदल रही है। ग्लोबल पावर बैलेंस भी प्रतिपल बदल रहा है। और इसके पीछे सबसे बड़ी फोर्स है टेक्नोलॉजी की स्पीड। आज कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि अगले 20 30 वर्षों की दुनिया कैसी होगी। लेकिन साथियों जब जब बदलाव का दौर आता है तबत चुनौतियां भी आती है और नए अवसर भी पैदा होते हैं। दुनिया बदलेगी, टेक्नोलॉजी भी बदलेगी, इंडस्ट्रीज बदलेगी, प्रोफेशंस भी बदलेंगे। लेकिन इन सबके बीच मेरी बात याद रखिएगा जो सीखेगा वो जीतेगा [प्रशंसा] जो नए चैलेंजेस के नए सॉलशंस खोजने का साहस रखेगा चैलेंजेस उसके लिए चांसेस बन जाएंगे और आपने यही तो आईआईटी दिल्ली से सीखा है। आखिर आपकी ये डिग्री क्या कहती है? क्या सिर्फ इस बात का प्रमाण है कि आपने एग्जाम पास किया? अच्छा सीजीपीए हासिल किया। या एक अच्छा प्लेसमेंट हासिल किया। निश्चित रूप से इन सबका अपना महत्व है। लेकिन मुझे लगता है आपकी डिग्री दुनिया को यह बताती है कि आप कठिन समस्याओं का समाधान करना जानते हैं। [प्रशंसा] आप अपने आईआईटी दिल्ली के सफर को याद कीजिए। यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। यहां की पढ़ाई भी आसान नहीं थी। लेकिन आपने हार नहीं मानी। यह डिग्री आपको एक दिन में नहीं मिली। एक एक विषय एक एक प्रोजेक्ट मिड सेम एंड सेम इन्हीं छोटे-छोटे कदमों ने आपको यहां तक पहुंचाया है। जीवन भी इसी सिद्धांत पर चलता है। जब कभी कोई चुनौती बहुत बड़ी लगे तो उसे घबराइए मत। उसे छोटेछोटे हिस्सों में बांट दीजिए। आपने खुद देखा है कैसे लैब में कोई प्रॉब्लम डेढ़ एंड तक यानी लगने लगती थी। सिमुलेशन में सॉल्यूशन खोजने में घंटे या दिन निकल जाते थे। लेकिन फिर आपने प्रॉब्लम सॉल्व भी की और कुछ नया लेकर भी आए। इसी तरह लाइफ में भी मुश्किलें आएगी लेकिन मुश्किलों का स्वभाव होता है। वह अकेली नहीं आती है। मुश्किल जब आती है ना तो साथ-साथ मौके भी लेकर आती है। सबको बस अलर्ट रहना है, सतर्क रहना है। इस संस्थान ने जो सिखाया है उसे बार-बार याद रखना है। साथियों, मैं लाइव की कुछ प्रैक्टिकल बातें भी आपसे शेयर करना चाहता हूं। कैंपस का जीवन और कैंपस के बाहर का जीवन इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर होता है। आईआईटी की परीक्षा में सिलेबस होता है लेकिन जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस होता है। आप याद करिए कैंपस लाइफ में सारे फंडे क्लियर होते थे। क्या पढ़ना है? कौन सा असाइनमेंट पूरा करना है? कौन सी परीक्षा देनी है? सब पहले से तय होता था। लेकिन जिंदगी कुछ अलग तरह से चलती है। वहां ना कोई तय कोर्स होता है ना कोई क्वेश्चन पेपर होता है। कई बार तो यह भी कोई नहीं बताता कि असली सवाल क्या था। वह सवाल भी आपको खुद पहचानना पड़ता है। मैंने आईआईटी के अनेक अलमनाई की यात्रा को देखा है। उनकी सक्सेस का कारण सिर्फ यह नहीं था कि उन्होंने सही जवाब दिए। उनकी सक्सेस का कारण यह था कि उन्होंने वह सवाल पहचाने जिन्हें दुनिया ने दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया था। उन्होंने उन समस्याओं का समाधान खोजा जिनके साथ बाकी लोग समझौते कर चुके थे। [प्रशंसा] और इसलिए लाइफ में क्यूरियोसिटी बनाए रखिए। अपनी लर्निंग इंस्टिट को जलाए रखिए। जगाए रखिए। चेतना बनाए रखिए। जो बातें बिना सोचे समझे स्वीकार कर ली जाती है। जरा उन्हें परखिए। उन पर सवाल उठाइए। लेकिन सिर्फ सवाल पूछकर मत रुकिए। उनका समाधान खोजने का साहस भी रखिए। यही सोच आपकी अलग पहचान बनाएगी। साथियों आप सब जानते हैं हर पीढ़ी के सामने उस टाइम पीरियड की अपनी चुनौतियां होती है और हर पीढ़ी का अपना एक राष्ट्रीय दायित्व भी होता है। हमारे देश ने गुलामी का वो समय भी देखा है जब उस पीढ़ी के सामने सिर्फ एक ही लक्ष्य था भारत की आजादी। उसके लिए उन्होंने सैक्रिफाइस किया। लंबा स्ट्रगल किया। आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। इसके पीछे उस पीढ़ी का तप त्याग और बलिदान है। और साथियों आज के इस दौर में हमारे सामने चुनौतियां भी अलग है। और इसलिए हमारे दायित्व भी अलग है। अपने जीवन के अगले 30 35 साल में आप जो कुछ भी करेंगे वो विकसित भारत की हमारी यात्रा को प्रभावित करेगा। इसलिए आपके हर निर्णय का आधार यह भी होना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा। इससे देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी? आज भारत इकोनॉमिक सेल्फ रिलायंस टेक्नोलॉजिकल सेल्फ रिलायंस इंडस्ट्रियल सेल्फ रिलायंस ऐसे हर सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के लिए काम कर रहा है। यही विकसित भारत की मजबूत नींव का सबूत है। इस मजबूत नींव पर आपको एक भव्य सुंदर विकसित भारत का निर्माण करना है। साथियों विकसित भारत की इस यात्रा में आपकी भूमिका बहुत बड़ी है। देश का युवा जितना सशक्त होगा उतना ही देश सशक्त होगा। इसी सोच के साथ हमने कई ऐसे सेक्टर्स ओपन किए हैं जहां युवाओं के लिए एंट्री ही एक तरह से बंद हुआ करती थी। सरकार की आधुनिक नीतियों की वजह से आज देश में युवाओं के लिए नए-नए सेक्टर्स भी बन रहे हैं। साथियों, पिछली बार जब मैं आपके सीनियर्स के कन्वोकेशन से वर्चुअली जुड़ने का मुझे अवसर मिला था। तब मैंने युवाओं के लिए स्पेस सेक्टर में हो रहे रिफॉर्म्स की चर्चा की थी। तब तक इस सेक्टर में लगभग पूरा काम सरकार ही करती थी। लेकिन आज वही स्पेस सेक्टर हजारों युवाओं के लिए नए अवसरों का आकाश बन चुका है। आज हमारे युवा अपने लॉन्च व्हीकल्स बना रहे हैं। रॉकेट ल्च कर रहे हैं और ऐसी उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं जो दुनिया के गिनेचुने देश ही हासिल कर पाए हैं। मुझे विश्वास है आज कहीं ना कहीं देश का कोई युवा इंजीनियर गर्व से कह रहा है फर्स्ट इन माय ब्लड लाइन टू बिल्ड अ रॉकेट सेमीकंडक्टर सेक्टर का उदाहरण भी हमारे सामने है। जब हमने इस दिशा में कदम बढ़ाया तो कुछ लोगों ने सवाल उठाए। कहा गया भारत ये नहीं कर पाएगा। लेकिन आज पहली सेमीकंडक्टर यूनिट्स में प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। और मैं साफ मानता हूं चीप से लेकर के शिप तक सब कुछ यहीं पर आप ही के हाथों से बनेगा। और कहीं कोई युवा पूरे आत्मविश्वास से कह रहा है फर्स्ट इन माय ब्लड लाइन टू मेक अ चीप इन इंडिया। साथियों आज आप हमारे ड्रोन सेक्टर को भी देखिए। आज इस सेक्टर में युवा नईनई संभावनाएं तैयार कर रहे हैं। कहीं ड्रोन से खेतों में काम लिया जा रहा है। ड्रोन दवाइयां पहुंचा रहा है। ड्रोन देश की रक्षा सुरक्षा में मदद कर रहा है। और आज कहीं कोई युवा कह रहा है फर्स्ट इन माय ब्लड लाइन टू मेक अ ड्रोन। साथियों भारत के स्टार्टअप रिवोल्यूशन को इसी पीढ़ी के आप जैसे युवाओं ने ही तराशा भी है, ताकत भी दी है। इसी इंस्टट्यूट से कितने ही फाउंडर्स निकले हैं। अगर एक इंस्टट्यूट से इतना कुछ हो सकता है तो सोचिए पूरे देश में कितनी बड़ी ताकत तैयार हो रही है। यूनिकॉर्न्स, डिजिटल पेमेंट्स, फिनटेक रिवोल्यूशन इन सभी ने देश के लाखों युवाओं को पहली बार कुछ नया करने का अवसर दिया है। साथियों, अभी ऐसे भी अनेक सेक्टर्स हैं जहां भारत अपनी नई यात्रा शुरू कर रहा है। और बड़ी जिम्मेदारी के साथ और बड़ी उम्मीदों के साथ देश आप जैसे युवाओं की ओर देख रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा सेंटर्स, क्रिटिकल मिनरल्स, डीप सी एक्सप्लोरेशन, बैटरीज, पावर शॉर्टेज, एनर्जी सिक्योरिटी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, क्वांटम कंप्यूटिंग ऐसे अनेक क्षेत्र आपके टैलेंट, आपके इनोवेशन और आपकी लीडरशिप का इंतजार कर रहे हैं और मैं भी इंतजार कर रहा हूं। साथियों अब एक और बड़ी संभावना आप सबके सामने है और वो नया अवसर है रिसर्च। आज देश को नईनई रिसर्च की बहुत जरूरत है और रिसर्च पर हमारा उतना ही फोकस भी है। प्राइम मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप हमारे प्रतिभाशाली युवाओं को रिसर्च करने का अवसर दे रही है। आइडियाज को आगे बढ़ाने का मौका मिले। इसके लिए रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्कीम शुरू की गई। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना भी हुई है ताकि देश में साइंस और रिसर्च को नई ताकत मिल सके। रिसर्च सेक्टर में ₹1 लाख करोड़ तक की फंडिंग की व्यवस्था की जा रही है। अंग्रेजी में बोलूं 1 लाख करोड़ यह आपके लिए बता रहा हूं। इसी तरह साथियों एकेडमिक रिसोर्सेज के एक्सेस को भी आसान बनाया गया है। वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन के माध्यम से आज दुनिया की प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल्स देश के छोटे से छोटे शहर में बिना किसी अतिरिक्त लागत के पहुंच रही है। साथियों मुझे पता है अभी इस दिशा में हमें लंबी दूरी तय करनी है और यह काम रिसर्च को लेकर आप सबके कमिटमेंट से ही हो सकता है इसके लिए देश को आपसे अपेक्षा भी है और सबसे बड़ी बात आप पर भरोसा भी है। साथियों अब मैं आपसे थोड़ा डिस्ट्रक्शन की बात करूंगा। जब हम बड़े गोल्स को अचीव करने के लिए प्रारंभ करते हैं, निकलते हैं तो एक बड़ा डिस्ट्रक्शन भी हमारे सामने आता है। यह डिस्ट्रक्शन होता है एक दूसरे से कंपैरिजन का। किसी को क्या पैकेज मिला? कौन किस कंपनी में गया? किस शहर में गया? किस देश में गया? किसने स्टार्टअप शुरू किया? आज के सोशल मीडिया के दौर में यह तुलना कभी खत्म नहीं होती। लेकिन याद रखिए जिंदगी कोई लीडर बोर्ड नहीं है। आपकी असली दौड़ किसी और से नहीं। खुद अपने आप से है। [प्रशंसा] हर दिन कल से बेहतर बनने की कोशिश करते रहिएगा। साथ ही अपनी फिजिकल हेल्थ, अपनी मेंटल हेल्थ का भी ध्यान रखिएगा। साथियों, मैं सभी स्टूडेंट्स को एक बार फिर बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आपके माता-पिता को, परिवार जनों को, विशेष बधाई देता हूं। आपके शिक्षकों को और उन सभी लोगों को भी। मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं जो इस पूरी यात्रा में हर कदम पर आपके साथ खड़े रहे। आप सभी का भविष्य उज्जवल हो। आप निरंतर नई ऊंचाइयों को छुए। इसी मंगल कामना के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।