Speech
Narendra Modi  ·  2026-08-01 00:00

PM's address at the inauguration of Swami Vivekananda Cultural Youth Centre - Viveka Smaraka, Mysuru

एल को नन्ना नमस्कार गो [हौसला बढ़ाने की आवाज़] रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन बेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज श्री रामकृष्ण आश्रम मैसूर के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्र जी राज्यपाल श्री थावरच गहलोत जी मुख्यमंत्री श्री डी के शिव कुमार जी सांसद यदवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी [हौसला बढ़ाने की आवाज़] विधायक विजेंद्र यदुरप्पा जी [हौसला बढ़ाने की आवाज़] के हरीश गड़ा जी अन्य महानुभाव पूज्य संतग और भाइयों और बहनों [हौसला बढ़ाने की आवाज़] सर्वप्रथम मैं मैसूर की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरु पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं इसमें रामकृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सत्संग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूर में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से मेरे गुरु बंधुओं से मिलने का उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से आज मैसूर की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं। साथियों मैं शुरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरों का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है कि शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहजा भी है, सवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसूर की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा है। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे। राष्ट्र कवि कुवें जैसे महापुरुष जब मैसूर में थे उनका भी रामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्री रामकृष्ण आश्रम और इसके जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं। साथियों व्यक्ति से विभूति का निर्माण एका का एक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनित परीक्षाएं देनी होती है। साधना करनी होती है। तप करना होता है। खुद को तपाना पड़ता है। खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वह उसकी सिद्धि का सहभागी सहभागी भी होता है। इसलिए भाइयों बहनों, स्वामी विवेकानंद जी के जीवन में मैसूरों का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले स्वामी जी एक युवा सन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसूर आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना जो उनके साथ जुड़े उनमें से एक प्रमुख नाम मैसूरों के तत्कालीन महाराजा के भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे तो उन्होंने वहां से मैसूर के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था। साथियों स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था। जो कहते हैं परम परोपकारार्थ यो जीवती सजीवती अर्थात वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] इसी मंत्र पर चलते हुए मैसूर के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने 100 साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं हो यह प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेक का स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का एक तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी। शिव ज्ञाने जीव सेवा यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेक का स्मारक में इसलिए ऐसे युवाओं को गढ़ना है जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित गरीब वंचित के दुख अपने सुख-दख से ऊपर हो। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो। मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो। साथियों स्वामी विवेकानंद जी युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं यह देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जकड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है। [प्रशंसा] आज भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। किसकी वजह से? भारत के युवाओं के सामर्थ्य से। आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको सिस्टम है। किसकी वजह से? भारत के युवाओं के सामर्थ्य से। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। किसकी वजह से? भारत के युवाओं के सामर्थ्य से। आज भारत से बने डिजिटल सॉलशंस दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। किसकी वजह से? भारत के युवाओं के सामर्थ्य से आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। किसकी वजह से? भारत के युवा के सामर्थ्य से। आज भारत एआई डिपटेक स्पेस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के नए अध्याय लिख रहा है। किसकी वजह से? भारत के युवाओं के सामर्थ्य से। अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ [प्रशंसा] एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो भारत का युवा अपना दमखम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं। आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा भारत की डिजिटल इकोनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वह देश की स्टार्टअप रिवोल्यूशन को लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो। मेक इन इंडिया का अभियान हो। इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है। साथियों किसी भी देश में युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है जब उसे सही अवसर मिले। जब उसे सही दिशा मिले। और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी है। [प्रशंसा] पिछले 12 वर्षों में करीब 14,000 नए कॉलेज बने हैं। [प्रशंसा] 4000 से ज्यादा नई आईटीआई बनाई गई है। नौ नए आईआईएम, सात नई आईआईटी और 13 नए एमबी स्थापित किए गए हैं। आज देश में एमबीबीएस की सीटें करीब 1 लाख 400 हो चुकी है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है। साथियों एक और हम एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्नाइज कर रहे हैं। साथ ही शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी भारत के युवाओं को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है। साथियों स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देश भर में 14,000 से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे। बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो इसके लिए 10,000 से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब स्थापित हुई है। साथियों स्वामी विवेकानंद जी राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव ना हो, अवसरों में भेदभाव ना हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियां भी सैनिक स्कूलों में एडमिशन ले रही है। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही है। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है। साथियों, युवा शक्ति का स्वास्थ्य अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं। वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया, यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स, और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देश भर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देश भर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है। खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही है। गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है। और साथियों आज इस अभियान के परिणाम भी साफ-साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं। हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही है। साथियों स्वामी विवेकानंद जी की तरह हमें विवेक का स्मारक बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से आग्रह करना चाहता हूं। साथियों मैसूर को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। [हौसला बढ़ाने की आवाज़][प्रशंसा] मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम यह संकल्प ले सकते हैं? कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहां की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड़ में काम करना होगा। साथियों आज ही यहां वाल्मीकि रामायण के कन्नडा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नडा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखक और कवियों की धरती है। कन्नडा भाषा कन्नडा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए? क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं? साथियों मैसूर अपने सिल्क चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें तो क्या हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वह किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी। साथियों स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है विवेक का स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर यहां एकत्र पूज्य संत जनों, गुरु बंधुओं और मैसूर के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।