Culture, awareness and rehabilitation can defeat drugs, PM urges everyone to join hands!
साथियों हमारे समाज में भी हमेशा नशे को एक बुराई के रूप में देखा है। हमारे संतों ने गुरुओं ने हमें इससे बचने के लिए चेताया। श्री गुरु ग्रंथ साहब में भी कहा गया है जितू पीतई मति दूरी होई बरलू पवई विच आई आपणा पराइया न पिछाने खसहहु धके खाई अर्थात जिस पदार्थ के सेवन से बुद्धि और विवेक साथ छोड़ दे। इंसान अपने और पराए की पहचान भूल जाए। ऐसा नशा उसे पतन की ओर ले जाता है। साथियों, हमारी संस्कृति में बचाव के लिए चेतावनी भी दी गई है। और नशे की आदत लगने पर उससे निकलने के रास्ते भी बताए गए हैं। समाज का सहयोग योग और ध्यान की ताकत यह नशे के खिलाफ हमारे अंतर्मन को ताकत देते हैं। और आज तो हमारे पास नशा छोड़ने के लिए रिहबिलिटेशन सेंटर जैसी सुविधाएं भी है। इसलिए अगर कोई युवा गलती से नशे में फंस भी गया है तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसके सारे रास्ते बंद हो गए हैं। हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है। घर का कोई बच्चा अगर नशे का शिकार बन गया है तो इसे सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में छिपाएं नहीं। जिसकी जरूरत हो उसका सहयोग मांगे। मन खोल के उससे बात करें। जो एक्सपर्ट हैं उनका सहयोग लें। मेडिकल हेल्प से अपने बच्चे को नशे से मुक्त कराने का प्रयास करें। हमें परिवार में बच्चों से खुलकर संवाद की संस्कृति भी बनानी चाहिए। ताकि ऐसे भंवर में फंसने से पहले ही आप उसका हाथ थाम सके। आपको भनक आ जाएगी। थोड़ा ध्यान रखिए पता चलेगा। उसमें बदलाव आ रहा है। वो खोया खोया लग रहा है। वो मुंह छिपा रहा है। कमरे में बंद हो जा रहा है। देर रात आ रहा है। पैसे अनाप शनाप मांग रहा है। यह सारी चीजों से पता चल जाता है। भनक आ जाती है। कुछ मामला गड़बड़ है। साथियों एक आवाहन मैं कॉलेज और यूनिवर्सिटीज के हमारे प्रोफेसर साथियों से भी करना चाहता हूं। आप भी कोर्स की पढ़ाई के साथसाथ स्टूडेंट्स के साथ ड्रग्स के खतरों पर बात करें। नशे के खिलाफ अपने कैंपस में एक मूवमेंट चलाएं। आपके प्रयास बड़े-बड़े परिणाम ला सकते हैं। और साथियों हमें एक और बात ध्यान रखनी है। जो युवा नशे से लड़कर बाहर निकलते हैं, वे कमजोर नहीं होते। जो नशे को परास्त करके निकला है ना, वह असली योद्धा होता है। समाज को उनका सम्मान करना चाहिए। अपनापन देना चाहिए। उसे दूसरा अवसर देना चाहिए क्योंकि ड्रग्स से जुड़ा किसी का अतीत उसकी पहचान नहीं हो सकता। उसका साहस उसकी पहचान होता है।