Speech
Narendra Modi  ·  2026-07-26 00:00

Strong community spirits and compassion! Sayantika’s journey to a border village..

नमस्कार टू ऑनरेबल प्राइम मिनिस्टर सर। हमारा नाम शायंतिका अ प्राउड माय भारत वॉलंटियर फ्रॉम द वेरी ब्यूटीफुल अंडमान एंड निकोबार आइलैंड्स। सायंतिका अभी तक जितने लोगों से मैंने बात की मुझे लगता है आप यंगेस्ट वन दिखती हो। सबसे छोटी हो आप। आई एम 21 अच्छा सायंका आपके विषय में बताइए और दूसरा आप किस गांव में गई? कैसे गई? सबसे कितना कठिन था वहां पहुंचना? जी सर। सर सबसे पहले मैं आपका धन्यवाद करूंगी कि आपने माय भारत पोर्टल जैसे एक वन स्टॉप स्यूशन के बारे में सोचा जिसमें मेरे जैसे ढाई करोड़ युवाओं को मौका मिला कि वो खुद भारत की अपने देश की आवाज बन सके और इसी के अंतर्गत इस साल हुए विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 के अंतर्गत मुझे मौका मिला बॉर्डर विलेजेस में जाने का और मुझे मौका मिला बहुत ही खूबसूरत मान विलेज में जाने का जो लद्दाख में है। सर जीरो फीट से अचानक 17,000 फीट जाना मेरे लिए एक बहुत ही नया अनुभव था और वहां की क्लाइमेट कंडीशन भी हमसे बहुत अलग और बहुत हारश थी और हमें एक्लिमेटाइजेशन के लिए पांच दिन दिया गया था और एक्लिमेटाइजेशन के पहले दिन मैं थोड़ी बीमार हो गई थी। परमाई भारत की टीम ने जी सर परमाई भारत की टीम ने और आईटीबीपी के जवानों ने मेरा बहुत ध्यान रखा और इसी में से मैं एक छोटा दिल को छू जाने वाला इंसिडेंट शेयर करना चाहूंगी। जब मैं बीमार हुई मेरा ऑक्सीजन लेवल ड्रॉप हो रहा था एक्यूट माउंटेन सिकनेस के कारण तब मुझे आईटीबीपी के हॉस्पिटल लेकर जाया गया फिफ्थ बटालियन से। तब सर मैंने वहां डॉक्टर को आईटीबीपी के डॉक्टर्स को कन्वर्सेशन करते हुए सुना अपने ही जवानों से कि हम आपकी बाद में चेकअप करेंगे। पहले हमें इस बेटी को ठीक करना है जो हमारी मेहमान बनकर आई है। इससे मुझे पता चला कि हमारे आईटीबीपी के जवान ना सिर्फ हमारी बॉर्डर की रक्षा करना जानते हैं बल्कि उनके मन में उनके देशवासियों के लिए भी कितना प्यार और कितना केयर है। जी साहंतिका आपने अंडमान निकोबार से लद्दाख तक की यात्रा पूरी की। एक द्वीप से 17,000 फीट तक की यात्रा का अनुभव एक प्रकार से जमीन से शिखर तक जाना आपके लिए अंडमान का जीवन वहां के लोगों की कठिनाइयां, ठंड का मौसम, बहुत पतली हवा आपको कैसा लगा? क्या अनुभव किया? सर मैंने लद्दाख में जाकर यह अनुभव किया कि मैं जहां रह रही हूं वहां डेली लाइफ कितना आसान है और लद्दाख जाकर मुझे यह महसूस हुआ कि वहां ऑक्सीजन की कमी होती है लोग एयर प्रेशर की वजह से और वहां जाकर मुझे यह महसूस हुआ कि वहां पर हर रोज अपने बॉडी कोड अप्ट कर पाना सर अपने आप में ही एक अचीवमेंट है। सर इसके अलावा मैं जरूर कहना चाहूंगी कि क्लाइमेट की चिंता तो हमें थी ही पर लद्दाख जाने से पहले, बॉर्डर विलेजेस जाने से पहले हमारी एक्सपेक्टेशंस कुछ ऐसी थी कि वहां पे इंटरनेट अच्छी नहीं मिलेगी। वहां सड़कें अच्छी नहीं होगी। तो हमने उस तरह से तैयारी कर कर हम बॉर्डर विलेजेस में गए थे। जैसे मेरे माता-पिता ने मुझे कैश दे दिया था कि वहां पर जरूर कैश की जरूरत होगी क्योंकि इंटरनेट सेवा नहीं है तो यूपीआई वहां नहीं चलेगी। पर वहां जाकर मैं आश्चर्यचकित थी देखकर कि उन बॉर्डर विलेजेस को जिन्हें लोग लास्ट विलेज लास्ट विलेज कहते हैं। वहां पर सिर्फ इंटरनेट की अच्छी सुविधा मिल रही थी और हमने यूपीआई पेमेंट भी किया वहां पर। अब हम उसको प्रथम गांव कहते हैं। अब हम उसको लास्ट विलेज नहीं कहते। फर्स्ट विलेज कहते हैं। जी। हम तो वहां आपने यूपीआई किया। जी सर। वहां पे मैंने यूपीआई किया। वहां के लोग यूपीआई के जानकार हैं। करते हैं यूपीआई का उपयोग। जी सर बिल्कुल जैसा हमने सोचा था वैसा नहीं है। हमारे ही जैसा वो भी यूपीआई का इस्तेमाल क्यूआर कोड रखते हैं। इवन वाईफाई भी रखते हैं कुछ कैफेस और होटल्स में। तो फिर तो आपको वाई-फाई मिल गया तो फिर तो आप अपने में ही खो ही रही होगी। बिल्कुल नहीं सर। मैं वैसे उतना फोन देखती नहीं हूं और वहां के वादियों में मैं तो बिल्कुल खो ही गई थी वहां के प्यारे-प्यारे लोगों के साथ। ज्यादातर मैंने बच्चों के साथ बहुत टाइम स्पेंड किया और वहां के बच्चों के नाम भी सर बहुत प्यारे-प्यारे और यूनिक से थे। मैं शेयर करूंगी। मुझे कुछ बच्चों के नाम याद है। गास्केट, बिस्किट, ढोलकर, नाम्याल, तनजिंग ये सारे मेरे वहां बच्चे दोस्तों के नाम है जो मैंने बॉर्डर विलेजेस में बनाए। उन बच्चों के मन में सवाल क्या था? पूछते होंगे तुम ये समुंदर कैसा होता है? तुम अंडमान निकोबार से आई हो? जी सर। वो बच्चे जानना चाहते थे कि हम कहां से आए हैं? सर जब मैं मान विलेज के प्राइमरी स्कूल में गई थी तब उनके क्लास में उनका क्लास बहुत सुंदर था। प्यारे-प्यारे पेंटिंग्स बने हुए थे दीवार पे और उसमें एक भारत का मैप भी था। पर सर मैंने वहां नोटिस किया कि हमारे अंडमान एंड निकोबार का मैप वहां में नहीं था। तो मैं उन्हें दिखा नहीं पा रही थी कि देखो यहां में अंडमान होता है। फिर मैंने उन्हें समझाया ये जो यहां में समुंदर है भारत के नीचे यहां में हमारा अंडमान है। और मैं एक छोटा सा इंसिडेंट शेयर करना चाहूंगी सर। एक बच्ची को मैंने पूछा कि क्या आप अंडमान आओगी जहां पे मैं रहती हूं? तो उस बच्ची ने बोला कि अंडमान आऊंगी। मैं मुझे बहुत पढ़ाई करना पड़ेगा। मुझे पता है पर मैं अंडमान बड़ी होकर जरूर आऊंगी। तो इतने प्यारे-प्यारे बच्चे थे सर वहां पर। चार सायंतिका क्या आपने सीमावर्ती गांव में क्योंकि गांव के लोग हर चीज बहुत सामूहिकता से करते हैं। सब मिलजुल के करते हैं। ऐसे कोई अनुभव आए कि जिसमें आप कह सकते हो हां बड़ा एक सामान्य रूप से नीचे हमें बहुत कम दिखता है। शहरों में बहुत कम दिखता है। लेकिन वहां आपको अनुभव आया हो। जी सर मैंने कई सारी ऐसी चीजें वहां ऑब्जर्व करी जो जो यह दिखाता है कि वहां की कम्युनिटी स्पिरिट कितनी स्ट्रांग है। वहां में सर हमने एक हमें लकीली एक शादी देखने का मौका मिला। जहां में हमने देखा अनलाइक हमारे सिटीज जहां पे हम कॉन्ट्रैक्ट देकर शादी करवा लेते हैं होटल बुक करवा कर। वहां के सभी लोग मिलकर खाना बना रहे थे। वही चेयर लगा रहे थे। वही सब कुछ सजा रहे थे। इसके अलावा जहां जो लोकल मोनेस्टरीज होते हैं उस उससे भी वहां के लोकल्स काफी कनेक्टेड होते हैं और उसमें जो भी इवेंट होता है जो भी उनका होता है रिलीजियस वो सब मिलजुलकर करते हैं। इसके अलावा एक और इंसिडेंट मैं शेयर करना चाहूंगी जो मैंने खुद तो नहीं देखा पर वहां के नंबरदार से सुना है सर। एक बार एक टावर जब गिर गई थी तब गांव वालों में गांव वालों ने किसी अथॉरिटी की वेट किए थे ना मोबाइल टावर मोबाइल जी सर जी सर तो मुझे ये सुनने को मिला कि गांव वालों ने बिना किसी अथॉरिटी के वेट किए खुद ही आपस में ये डिसाइड किया कि वही टावर को खड़ा करेंगे और बस इतना ही नहीं सर मुझे तो अंदाजा नहीं है पर शायद कुछ बैटरीज की जरूरत होती है टावर के लिए और उन लोगों ने साथ मिलकर उन बैटरी के लिए एक वेयर हाउस भी खुद से बनाया मिलकर अरे वाह जी सर तो ये थी वहां के लोगों की कम्युनिटी स्पिरिट इससे मैंने भी बहुत कुछ सीखा साइंतिका का निश्चित तौर पर यह यात्रा आपके जीवन पर बहुत प्रभाव डालेगी। जी सर व्हेन यू शेयर जॉय इट मल्टीप आप जब अपने घर के लोगों से बातें करें। अपने दोस्तों से बातें करें। स्कूल कॉलेज में शायद इस अनुभवों को शेयर करें। तो इसके विषय में कुछ ना कुछ लिखते रहना चाहिए। इन अनुभवों को एक किताब के रूप में, आर्टिकल के रूप में और औरों में भी जागरूकता फैलानी चाहिए कि देश कितना विशाल है। देश के लोगों की भावना कैसी है और आपकी यात्रा ने जिस प्रकार से आपको मन को देश के प्रति लगाव पैदा करने वाला, देश का एक अनुभव करने वाला इन सारी चीजों को आपने शेयर करना चाहिए। औरों को सिखाना चाहिए, समझाना चाहिए। चलिए बहुत अच्छा लगा। धन्यवाद। आपको बहुत-बहुत बधाई।