Honouring the timeless legacy of Sikh heritage..
भारत जितना महत्व अपनी इकोनमी और इकोलॉजी को देता है उतना ही फोकस अपनी हेरिटेज पर भी करता है। साथियों भारत कैसे काम करता है? इसका एक उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप है। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] जब अफगानिस्तान में संकट आया तो हम गुरु ग्रंथ साहब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए। [प्रशंसा] साथियों हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे सेवा के सेंटर है। कोई भूखा आए उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में है, उसे सहारा मिलता है। इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहब में सेवा के लिए एफसीआरए से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही है। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया। [प्रशंसा] साथियों आप सभी श्री हेमकुंड साहब जी के बारे में भी जानते हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहां अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है। बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई बहन वहां यात्रा के लिए जाते हैं। वहां दर्शन के लिए जाने में खास करके हमारे बुजुर्गों को हमारे सिख भाई बहनों को सहूलियत हो इसलिए सरकार हेमकुंड साहब तक रॉकवे भी बनवा रही है। [हौसला बढ़ाने की आवाज़] साथियों हमारी ही सरकार ने साहिब जादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में 26 दिसंबर को प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को भारत में वीर बाल दिवस मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरला से केरलम से लेकर असम तक बच्चा बच्चा भी चारों साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है। वीर बाल दिवस ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है। साथियों मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात आज करना चाहता हूं। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं श्रीमान हरदीप पुरी जी। पूरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोविंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था कि उनके परिवार ने श्री गुरु गोविंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के जोड़े साहब 300 साल से संजो के रखे हैं। बंटवारे के समय पूरी साहब के परिवार ने उनके पूर्वजों ने उन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए। पवित्र जोड़े साहब को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था। जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोग इनके दर्शन कर सके। फिर हमने एक समिति बनाई जो सिख परंपराओं को जानते हैं। इन जानकारों की हमने एडवाइज ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए। जहां उनका जन्म हुआ। यानी हमारे श्री पटना साहिब मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।