How Dr. Syama Prasad Mookerjee’s vision transformed into a nationwide movement?
साथियों डॉक्टर मुखर्जी का जीवन एक विचार से जन आंदोलन तक की परिणति का प्रेरक है। उन्होंने भारत में एक वैचारिक आंदोलन को जन्म दिया। आप देखिए जिस समय जनसंघ की स्थापना हुई थी तब हर तरफ कांग्रेस की ही बोलबाला थी। कांग्रेस का ही वर्चस्व दिखाई देता था। एक ऐसे दौर में जब अलग विचार के लिए कोई जगह ही नहीं थी। बड़ी मुश्किल सा पैर रखने के लिए भी जगह मिल जाए। तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उन सारी परिस्थितियों को चुनौती देते हुए एक नए विचार का साहस किया। यह केवल एक संगठन बनाने का निर्णय नहीं था। एक राजनीतिक दल को जन्म देने का काम नहीं था। यह लोकतंत्र में वैचारिक विविधता, राष्ट्रीय चिंतन और जन भागीदारी पर उनके अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति थी। इसी विश्वास से भारतीय जनसंघ का जन्म हुआ और साथियों कोई भी विचार केवल स्थापना से अमर नहीं होता। विचार तब अमर होता है जब पीढ़ियां उसे अपने जीवन से सींचती है। भारतीय जनसंघ के उस छोटे से दिए को जलाए रखने के लिए लक्षावधि कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन खपा दिया। पलपल तिल तिल लाखों कार्यकर्ताओं के तप त्याग और समर्पण ने उस दिए की लौ को कभी बुझने नहीं दिया। आज वह दिया अपने मूल स्वरूप में भले ना दिखाई देता हो भारतीय जनसंघ आज उसी रूप में भले ना हो लेकिन उस दिए का जो प्रकाश पुंज था वो आज करोड़ों देशवासियों के विश्वास का प्रकाश बनकर फैल रहा है। उसी प्रकाश का विस्तार आज पूरे देश में खिले हुए करोड़ों कमल के रूप में भी दिखाई देता है। कभी जो भारतीय जनसंघ था वही आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बनकर जनसेवा कर रहा है। साथियों अक्सर हम देखते हैं कि समय के साथ कुछ विचारों का आकर्षण फीका पड़ जाता है। लेकिन आप सोचिए यह कितना सशक्त विचार बीज डॉक्टर मुखर्जी ने रोपा है कि आज इतने साल बाद भी उसका इतनी तेजी से विस्तार हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है जब आने वाली पीढ़ियां भारतीय जनता पार्टी की इस यात्रा का इतिहास लिखेगी इसका अध्ययन करेंगी तब वे निश्चित रूप से डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों उनके साहस और उनकी दूरदृष्टि का उल्लेख करेगी। और मैं फिर कहूंगा बंगाल के लिए तो यह डबल खुशी की बात है। एक तो डॉ. मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती और दूसरा बंगाल में यह आयोजन। उनके विचार पुंज से निकली भाजपा सरकार में यह भव्य उत्सव हो रहा है। पश्चिम बंगाल की जनता की तरफ से अपने महान सपूत को यह बहुत ही आत्मीय श्रद्धांजलि है।