Dr. Syama Prasad Mookerjee made the ultimate sacrifice for national unity, learn more about it!
शास्त्रियों संसद में अपने एक भाषण में डॉक्टर मुखर्जी ने कहा था और यह डॉक्टर मुखर्जी का यह वाक्य आज भी हमें प्रेरणा देता है। डॉक्टर मुखर्जी ने पार्लियामेंट में कहा था राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है। और देखिए आज देश गर्व से कह सकता है कि डॉक्टर मुखर्जी अंतिम सांस तक इसी विश्वास को वह जीते थे। उन्होंने इसे जिया था। 1947 में जब देश का विभाजन हुआ लगभग तय हो चुका था। तब एक और संकट सामने था। पूरे के पूरे बंगाल को ही भारत से अलग करने की साजिशें रची रही थी। तब डॉक्टर मुखर्जी इन साजिशों के सामने चट्टान बनकर खड़े हो गए। उन्होंने जनमत तैयार किया। राजनीतिक संघर्ष किया और यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहे और तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हुंकार भरी थी। उनके शब्द थे कांग्रेस देश भाग कोरे से आ पाकिस्तान के भाग को यानी कांग्रेस ने देश का बंटवारा किया और मैंने पाकिस्तान का ही बंटवारा कर दिया। साथियों, यह जो हुंकार है, इसकी जो ताकत है, इसमें जिस बड़ी राजनीतिक इच्छा शक्ति के दर्शन होते हैं, उसका एहसास हमें तब भी होता है जब हम आज की परिस्थितियों को देखते हैं। साथियों डॉ. मुखर्जी एक भारत श्रेष्ठ भारत के लिए पूरी तरह से समर्पित थे और इसलिए जब देश में दो विधान दो प्रधान दो निशान की बात हुई तो डॉक्टर मुखर्जी ने इसका भी जमकर विरोध किया। उन्होंने देश को मंत्र दिया। एक देश है द्विधान प्रधान एवं द्विशान आमरा को खोनो मैंने नेबोना यानी एक देश में दो विधान दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे। यह केवल एक नारा नहीं था। यह समान अधिकार, समान संविधान और समान राष्ट्रीय चेतना का आह्वान था। उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया। जेल गए और अंततः कश्मीर के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज हमारी सरकार को इस बात का गर्व है कि आर्टिकल 370 की दीवार गिराकर हमने डॉक्टर मुखर्जी का सपना पूरा किया है। साथियों आज जब हम एक भारत श्रेष्ठ भारत की बात करते हैं तो यह उसी राष्ट्रीय दृष्टि का विस्तार है जिसे डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन से परिभाषित किया। एक ऐसा भारत जहां उत्तर और दक्षिण के बीच कोई दूरी ना हो। जहां पूर्व और पश्चिम समान अवसरों के सहभागी हो। जहां हर राज्य अपनी विशिष्ट पहचान के साथ भारत की सामूहिक शक्ति बने। जहां हर नागरिक, एक ही संविधान, एक ही राष्ट्रीय भावना और एक ही भविष्य के संकल्प से जुड़ा हो। मुझे खुशी है कि डॉक्टर मुखर्जी की प्रेरणा से आज भारत का संविधान पूरे देश में आन बान शान के साथ लागू है।